सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : डॉ. एमजीआर जानकी महिला कॉलेज की 4,000 से अधिक छात्राओं ने आदि पेरुक्कु का उत्सव मनाया, जो तमिल माह ‘आदि’ के अठारहवें दिन मनाया जाने वाला एक पारंपरिक त्योहार है, जिसमें नदियों के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। आधी साड़ी और साड़ी पहनकर छात्राओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए इस पर्व की आत्मा को जीवंत कर दिया।
इस अवसर पर छात्राओं ने ‘मुलैपरी’ पूजा में भाग लिया, जिसमें नौ प्रकार के अनाज और दालों से उगे अंकुरों से भरे मिट्टी के कलश उठाए गए। उन्होंने पारंपरिक रीति का प्रतीकात्मक पुनर्निर्माण करते हुए एक छोटे तालाब में दीप प्रवाहित किए, जैसा कि आमतौर पर नदियों में किया जाता है। छात्राओं ने ‘चित्रन्नम’ का भी आनंद लिया, जिसमें नींबू चावल, इमली चावल और नारियल चावल जैसे पारंपरिक व्यंजन शामिल थे।
उत्सव की रौनक बढ़ाने के लिए छात्राओं ने पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत किए जिनमें ‘देवरट्टम’, ‘करकट्टम’, ‘पुलियाट्टम’, ‘ओयिलाट्टम’, ‘सक्कैयाट्टम’, ‘पोइकाल कुதிரैयाट्टम’, ‘मयिलाट्टम’ और नाट्य रूपांतरण (डांस ड्रामा) शामिल थे। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों ने भी नृत्य प्रस्तुति दी और अगरम संस्था की छात्राओं ने भी उत्सव में भाग लिया। संपूर्ण आयोजन ग्रामीण परंपराओं की एक जीवंत झलक प्रस्तुत करता नजर आया।
कॉलेज के अध्यक्ष डॉ. कुमार राजेन्द्रन ने कहा, “हमारी परंपरा को संरक्षित करना और अपनी जड़ों को जानना मानवता की प्रगति और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए आवश्यक है। इस तरह के उत्सव युवाओं को हमारी 5000 वर्ष पुरानी विरासत से परिचित कराने और उसे आगे बढ़ाने में सहायक होंगे। यह तमिल संस्कृति को संरक्षित रखने की हमारी एक छोटी-सी कोशिश है। साथ ही, ‘संधाई’ की अवधारणा, जिसमें सभी स्टॉल छात्राओं द्वारा संचालित किए गए, उनके विपणन और उद्यमिता कौशल को विकसित करने में मदद करेगी।”
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