सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : सौ साल के दुर्लभ अखबार केवल मीडिया के विद्यार्थियों के लिए ही उपयोगी नहीं हैं, यह हरेक भारतीय के लिए भी एक रोमांचकारी प्रयोग है। इनमें भारत के स्वाधीनता संघर्ष, स्वाधीन भारत के निर्माण और राजनीतिक उतार-चढ़ावों के साक्षात दर्शन होते हैं। आप हर दशक में आए बदलावों और समकालीन नेताओं के क्रियाकलापों को साफ देख सकते हैं। यह बात माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विवि (एमसीयू) के भ्रमण पर आए डॉ. अश्विनी सरदाना ने कही। वे 1989 में गाँधी मेडिकल कॉलेज से एमडी करने के बाद अमेरिका जा बसे, जहाँ वाशिंगटन स्थित जॉर्ज टाउन यूनिवर्सिटी के मेडस्टार हेल्थ में सेवारत हैं। एमसीयू में वे विशेष रूप से सौ साल में भारत में घटी महत्वपूर्ण घटनाओं के फ्रंट पेज पर आधारित चर्चित प्रदर्शनी सदी साक्षी है का अवलोकन करने आए। उन्होंने कहा कि यह अखबारी फ्रेम भारत केंद्रित शोध के लिए काफी उपयोगी सामग्री हैं। उनके पिता डॉ. सीके सरदाना भेल में सेवारत थे, जिन्होंने बाद में एमसीयू में कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन पढ़ाया। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश श्रोती भी उपस्थित थे। कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने उन्हें विश्वविद्यालय की 35 वर्षों की यात्रा और मीडिया संबंधी नए-नए प्रयोगों की जानकारी दी।
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