सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : पाँच में से तीन भारतीयों को हर रात पर्याप्त नींद नहीं मिल रही है, और एक चौथाई लोगों ने बताया है कि महामारी के बाद से उनकी नींद और भी बिगड़ गई है। यह जानकारी एजीआर नॉलेज सर्विसेस की एक नई ट्रेंड रिपोर्ट में सामने आई है।
स्वास्थ्य सेवाओं की तलाश करने के बजाय, अधिकांश लोग ऑनलाइन समाधानों और सप्लीमेंट्स की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे नींद सुधारने वाले उत्पादों का बाज़ार तेजी से फल-फूल रहा है।
“द मॉडर्न स्लीप बाज़ार: कैसे नींद की कमी भारत में एक वेलनेस अवसर बन गई” नामक इस रिपोर्ट ने डिजिटल बातचीतों, सर्च क्वेरीज़ और उपभोक्ता भावनाओं का विश्लेषण कर देश में बढ़ते नींद संकट और इससे जुड़े वाणिज्यिक रुझानों को उजागर किया है।
एजीआर नॉलेज सर्विसेस के सोशल मीडिया इंटेलिजेंस विभाग के अध्यक्ष सुयोग केलुस्कर ने कहा,
“हम देख रहे हैं कि लोग नींद सुधारने वाले उत्पादों को एक बार के समाधान की बजाय अपनी रात की दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं। उपभोक्ता केवल उत्पाद नहीं खरीद रहे—वह मानसिक शांति खरीद रहे हैं और नींद को एक सक्रिय वेलनेस अभ्यास बना रहे हैं।”
यह शोध बाज़ार में महत्वपूर्ण खामियों को दर्शाता है। उपभोक्ता जहां समाधान खोज रहे हैं, वहीं उनकी डिजिटल चर्चाएं सुरक्षा, आदत बनने के खतरे और उत्पादों की प्रभावशीलता जैसे मुद्दों पर केंद्रित हैं—जो यह दर्शाता है कि उपभोक्ता ब्रांडों से अधिक पारदर्शिता की अपेक्षा कर रहे हैं।
यह ट्रेंड स्वास्थ्य और वेलनेस कंपनियों के लिए एक बड़ा अवसर प्रस्तुत करता है, खासकर उन ब्रांडों के लिए जो विश्वसनीयता के साथ बाज़ार में प्रवेश करना चाहते हैं। उपभोक्ता अब परिणामों के साथ-साथ भरोसे की भी तलाश कर रहे हैं। यह बदलाव भारत में वेलनेस के प्रति दृष्टिकोण में एक व्यापक परिवर्तन को दर्शाता है, जहां अब नींद भी फिटनेस और पोषण की तरह एक सक्रिय स्वास्थ्य प्रयास मानी जा रही है, न कि केवल एक स्वाभाविक आवश्यकता।
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