ईरान और इजराइल के बीच 12 दिन तक चले भीषण संघर्ष में मारे गए 60 ईरानी अफसरों का शनिवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इनमें से 30 शीर्ष सैन्य कमांडर और 11 परमाणु वैज्ञानिक शामिल थे। राजधानी तेहरान में आयोजित जनाजे में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए।
जनाजे में शहीद अफसरों के ताबूतों को ईरानी झंडे में लपेटकर सजा गया था और उनके साथ तस्वीरें भी रखी गईं। भीड़ ने “शहीदों अमर रहें” के नारों के साथ उन्हें विदाई दी। इस दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ, न्यायपालिका प्रमुख मोहसेनी-एजेई और कुद्स फोर्स कमांडर इस्माइल कानी जैसे वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे।
ट्रंप का सनसनीखेज दावा: “मैंने खामेनेई को मौत से बचाया”
इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को “एक भयानक और अपमानजनक मौत” से बचाया। ट्रंप ने कहा, “मुझे पूरी जानकारी थी कि वह कहां छिपे हैं, लेकिन मैंने अमेरिकी और इजरायली सेनाओं को उन्हें मारने से रोक दिया। मुझे उनसे धन्यवाद की उम्मीद नहीं है।”
इजराइली रक्षा मंत्री का खुलासा: “अगर मौका मिलता तो खामेनेई को मारते”
इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने भी माना कि खामेनेई को निशाना बनाने की योजना थी। उन्होंने कहा, “अगर वह हमारी पहुंच में होते तो हम उन्हें खत्म कर देते।” काट्ज ने जोर देकर कहा कि इस तरह के ऑपरेशन्स के लिए इजराइल को किसी की अनुमति की जरूरत नहीं।
ईरान का विरोध: राष्ट्रपति बोले- “हमला अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन”
वहीं, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने बेलारूस में चल रहे यूरेशियन आर्थिक मंच में वर्चुअल माध्यम से कहा कि इजराइली हमलों का जवाब देना जरूरी था। उन्होंने अमेरिकी और इजरायली हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए संयुक्त राष्ट्र और IAEA से कठोर कार्रवाई की मांग की।
जनाजे से संदेश: ईरान पीछे हटने को तैयार नहीं
इंकलाब स्क्वायर पर जनाजे के दृश्य यह संकेत देते हैं कि ईरान इस संघर्ष को लेकर जनता की सहानुभूति और समर्थन के साथ आगे बढ़ रहा है। उधर, पश्चिमी देशों की नजर अब इस पर है कि क्या सीजफायर के बाद शांति बहाल होगी या यह एक बड़े युद्ध की शुरुआत थी।
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