सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस  /  आईटीडीसी न्यूज़  भोपाल  /   नई दिल्ली :   भारतीय किसान ऑस्ट्रेलिया को जैविक उत्पाद निर्यात कर अपनी कमाई बढ़ा रहे हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत से ऑस्ट्रेलिया को जैविक निर्यात 8.96 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। इसमें नारियल का दूध, ईसबगोल की भूसी और चावल जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों की निर्यात बढ़ोतरी से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच जैविक उत्पादों के लिए म्यूचुअल रिकॉग्निशन अरेंजमेंट  हुआ है। यह समझौता भारत-ऑस्ट्रेलिया इकोनॉमिक कॉरपोरेशन एंड ट्रेड अरेंजमेंट की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। म्यूचुअल रिकॉग्निशन अरेंजमेंट  के तहत भारत में उगाए और प्रोसेस किए गए जैविक उत्पाद आसानी से ऑस्ट्रेलियाई बाजार में पहुंचेंगे। इस समझौते से किसानों और निर्यातकों को नए अवसर मिलेंगे। इसमें समुद्री शैवाल, जलीय पौधे और ग्रीनहाउस फसलों को छोड़कर, बिना-प्रोसेस वाले प्लांट प्रोडक्ट्स, प्लांट ऑरिजिन, एक या अधिक इंग्रेडिएंट्स वाले प्रोसेस्ड फूड आइटम्स और वाइन शामिल हैं। किसानों के लिए यह सालभर की आमदनी का अच्छा स्रोत बन सकता है। इससे ग्रामीण भारत में जैविक कृषि को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के निर्यात समझौते भारत की अंतरराष्ट्रीय व्यापार क्षमता को भी बढ़ाते हैं और किसानों को वैश्विक बाजारों से जोड़ते हैं। इस समझौते के चलते अब भारतीय जैविक उत्पादों की मांग ऑस्ट्रेलिया में और बढ़ने की उम्मीद है। इससे किसानों की मेहनत और उत्पादन का सही मूल्य उन्हें मिल सकेगा।

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