सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : साइनडेस्क रिसर्च काउंसिल ने आज अपनी नई शोध रिपोर्ट “बियॉन्ड द सिग्नेचर: भारत की कॉर्पोरेट लीगल टीमें कैसे अपना रही हैं डिजिटल कॉन्ट्रैक्ट्स” जारी की। भारत में इस तरह का यह पहला विश्लेषण है, जो यह दर्शाता है कि देशभर में इन-हाउस लीगल विभाग मैनुअल, कागज़-आधारित प्रक्रियाओं से डिजिटल और ऑटोमेटेड कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट की ओर कैसे बढ़ रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, 82% कॉर्पोरेट लीगल टीमें देरी और मैनुअल प्रक्रियाओं को प्रमुख चुनौतियों के रूप में देखती हैं। यह इस बात की ओर संकेत करता है कि लीगल विभागों के लिए इंटेलिजेंट कॉन्ट्रैक्ट लाइफसायकल मैनेजमेंट (सीएलएम) सिस्टम अपनाना जरूरी हो गया है, ताकि वे प्रतिस्पर्धा में बने रह सकें और नियामकीय मानकों का पालन कर सकें।

शोध में भारत के विभिन्न सेक्टर्स जैसे बीएफएसआई, टेक्नोलॉजी, फार्मा, मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल से जुड़े 500 से अधिक लीगल प्रोफेशनल्स ने भाग लिया। अध्ययन भारत के प्रमुख महानगरों जैसे मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली, हैदराबाद, पुणे, चेन्नई और कोलकाता में किया गया। उत्तरदाताओं में जनरल काउंसल, लीगल ऑपरेशंस हेड्स, और लीगल मैनेजर्स शामिल थे, जो स्टार्टअप्स से लेकर बड़े एंटरप्राइज़ तक फैले हुए थे।

मुख्य निष्कर्ष: एक बदलाव के दौर में लीगल सेक्टर

डिजिटल अपनाने में वृद्धि, लेकिन अधूरी: 43% उत्तरदाताओं ने किसी न किसी रूप में ई-सिग्नेचर या डिजिटल कॉन्ट्रैक्ट टूल अपनाया है, लेकिन केवल 18% ने पूरी तरह एकीकृत सीएलएम सिस्टम लागू किया है।

बीएफएसआई सेक्टर अग्रणी: 75% से अधिक BFSI संगठन ई-सिग्नेचर का उपयोग कर रहे हैं, जबकि अन्य उद्योगों में यह दर 53% है।

समय, अनुपालन और लागत प्रमुख कारक: 86% उत्तरदाताओं ने समय की बचत, 74% ने बेहतर अनुपालन, और 68% ने लागत में कटौती को डिजिटल बदलाव के मुख्य कारण बताया।

बाधाएं अब भी मौजूद: 57% लीगल टीमें अब भी ऑफलाइन हैं। मुख्य कारण हैं – कानूनी वैधता को लेकर संदेह (52%), क्लाइंट की अनिच्छा (45%), और साइबर सुरक्षा की चिंता (41%)।

नियमों की जानकारी कम: सिर्फ 39% पेशेवरों को भारतीय ई-सिग्नेचर कानूनों की पूरी जानकारी है, जबकि IT अधिनियम, DPDPA 2023, और आधार आधारित प्रमाणीकरण के अंतर्गत स्पष्ट ढांचा मौजूद है।

शहरवार रुझान: बेंगलुरु (58%), मुंबई (54%) और दिल्ली-एनसीआर (51%) डिजिटल अपनाने में अग्रणी हैं; जबकि कोलकाता (35%) और चेन्नई (37%) पिछड़ रहे हैं।

स्वचालन अगला कदम: 74% लीगल टीमें ऑटोमेटेड टूल्स अपनाने के इच्छुक हैं जैसे ड्राफ्टिंग, वर्ज़निंग, रिस्क अलर्ट और रिमाइंडर के लिए।

रिपोर्ट में लीगल डिपार्टमेंट्स के लिए एक सात-चरणीय रोडमैप भी बताया गया है, जिसमें इंटरनल ऑडिट, स्टेकहोल्डर शिक्षा, स्केलेबल प्लेटफॉर्म चयन, और प्रभाव की निगरानी जैसे कदम शामिल हैं।