सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस  /  आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल  : भारत और अमेरिका के बीच फरवरी 2025 से शुरू हुई ट्रेड डील बातचीत अब तक किसी निर्णायक समझौते तक नहीं पहुंच पाई है। छह महीने बीत जाने के बाद भी दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। मुख्य अड़चनें एग्रीकल्चर, डेयरी सेक्टर, टैरिफ पॉलिसी, और राजनीतिक रणनीतियों को लेकर हैं।

अमेरिका चाहता है कि भारत उसके डेयरी और कृषि उत्पादों को अपने बाजार में अनुमति दे, लेकिन भारत अपने किसानों के हित और धार्मिक भावनाओं की वजह से इस पर सहमत नहीं है। भारतीय सरकार मांग कर रही है कि केवल वही डेयरी उत्पाद आयात किए जाएं जो शुद्ध शाकाहारी हों, क्योंकि अमेरिका में कई उत्पादों में पशु-उत्पन्न एंजाइम्स पाए जाते हैं।

दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर 1 अगस्त से 25% टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है। उन्होंने BRICS समूह और रूस से भारत के हथियार-तेल आयात को भी इसकी वजह बताया। ट्रम्प का कहना है कि BRICS डॉलर को चुनौती दे रहा है, और अमेरिका किसी को भी यह करने नहीं देगा।

भारत ने पहले ही कई अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ घटाए हैं, लेकिन अब वह ऐसी किसी डील पर हस्ताक्षर नहीं करना चाहता जो केवल अमेरिका के हित में हो। भारत अपने MSME सेक्टर और किसानों को लेकर विशेष सतर्कता बरत रहा है।

अब उम्मीद की जा रही है कि 25 अगस्त को भारत दौरे पर आ रही अमेरिकी टीम के साथ होने वाली बैठक में कोई रास्ता निकले। सितंबर-अक्टूबर तक अंतरिम ट्रेड समझौते की संभावना को लेकर दोनों पक्ष प्रयासरत हैं।

ट्रेड डील की बाधाएं संक्षेप में:

  1. डेयरी व एग्री उत्पादों पर भारत की शर्तें

  2. अमेरिकी टैरिफ नीति पर असहमति

  3. अमेरिकी बाजार में भारत की हिस्सेदारी को लेकर जटिलताएं

  4. BRICS व रूस से रिश्तों पर अमेरिका की आपत्ति

इस मसले पर विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ व्यापारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक व सांस्कृतिक टकराव भी है, जिसमें जल्द समाधान की संभावना सीमित दिखाई दे रही है।

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