भारत ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि उसकी संप्रभुता पर कोई विदेशी टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है। इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) द्वारा जम्मू-कश्मीर को लेकर की गई ‘तथ्यात्मक रूप से गलत और अनुचित’ टिप्पणी पर विदेश मंत्रालय की सख्त प्रतिक्रिया इस दिशा में एक निर्णायक संकेत है। यह प्रतिक्रिया केवल एक कूटनीतिक बयान नहीं, बल्कि भारत की बदलती हुई विदेश नीति की झलक है – जहां अब चुप्पी नहीं, सटीक प्रतिउत्तर है।

OIC ने अपने एक हालिया बयान में पाकिस्तान की भाषा बोलते हुए कश्मीर को लेकर ऐसे तथ्य प्रस्तुत किए, जो न केवल झूठे हैं, बल्कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता पर प्रत्यक्ष प्रहार करते हैं। यह वही OIC है, जिसे इस्लामी देशों के साझा हितों की रक्षा के लिए गठित किया गया था, लेकिन समय-समय पर यह मंच पाकिस्तान के एकतरफा और भ्रामक प्रचार का औजार बनता रहा है।

भारत सरकार ने बिल्कुल साफ कहा है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है – संवैधानिक, ऐतिहासिक और कानूनी दृष्टि से यह विषय पूर्णतः स्पष्ट है। आज जब जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ रही है, स्थानीय स्तर पर विकास हो रहा है, और सामान्य स्थिति बहाल हो रही है, तब इस तरह के बयान केवल सच्चाई से मुँह मोड़ने का प्रयास हैं।

इस मामले का एक गहरा पक्ष यह भी है कि पाकिस्तान अपने घरेलू विफलताओं से ध्यान हटाने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भ्रमित करने के लिए कश्मीर को बार-बार वैश्विक मंचों पर घसीटता है। यह उसकी पुरानी रणनीति है, जो अब न तो कारगर है और न ही भरोसेमंद। लेकिन जब OIC जैसा मंच इसका साथ देता है, तो यह उस मंच की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

भारत का स्पष्ट संदेश यही है – किसी भी संगठन को उसके मंच का दुरुपयोग नहीं करने देना चाहिए। यदि OIC अपनी साख बनाए रखना चाहता है, तो उसे निष्पक्षता और तथ्यपरकता के मूल्यों को अपनाना होगा।

भारत आज सिर्फ अपनी सीमाओं की रक्षा नहीं कर रहा, बल्कि वह एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में खड़ा है – जो तथ्य, तर्क और आत्मसम्मान के साथ हर झूठ और प्रोपेगंडा का जवाब देने को तैयार है।

आज की कूटनीति में चुप्पी कमजोरी नहीं, स्पष्टता ही शक्ति है – और भारत ने यह स्पष्टता दिखा दी है।

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