सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /  आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल :  भारत के गारमेंट निर्यात को वैश्विक स्तर पर बड़ा मौका मिला है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले दो महीनों में भारत का गारमेंट निर्यात 12.80% बढ़ा है। अकेले मई महीने में इस क्षेत्र में 11.35% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि कुल वस्तु निर्यात में 2.17% की गिरावट आई। इस बढ़ोतरी के पीछे दो अहम कारण माने जा रहे हैं—बांग्लादेश में आंतरिक तनाव और अमेरिका में चीन के गारमेंट पर अधिक शुल्क।

अमेरिकी बाजार में अवसर

अमेरिका हर साल 120 अरब डॉलर का गारमेंट आयात करता है। इसमें चीन की हिस्सेदारी 30 अरब डॉलर और भारत की लगभग 10 अरब डॉलर है। मौजूदा समय में अमेरिका द्वारा चीन के गारमेंट पर अधिक शुल्क लगाए जाने से भारतीय गारमेंट की मांग में इजाफा हुआ है।

बांग्लादेश की समस्याएं बनीं भारत के लिए मौका

बांग्लादेश में पिछले साल अगस्त से चल रहे आंतरिक संकट के चलते कई वैश्विक खरीदार अब भारत की ओर रुख कर रहे हैं। इससे भारत को न केवल निर्यात बढ़ाने का अवसर मिला है बल्कि उत्पादन क्षमता विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।

रोजगार और कच्चे माल की चुनौती

गारमेंट सेक्टर रोजगार सृजन में अहम भूमिका निभाता है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि इस मौके का लाभ तभी उठाया जा सकता है जब कच्चा माल सस्ती दरों पर उपलब्ध हो। कॉटन के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी और मैन-मेड फाइबर की सीमित उपलब्धता लागत को प्रभावित कर सकती है।

भारत के लिए यह समय वैश्विक गारमेंट बाजार में बड़ी छलांग लगाने का है।

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