बजट 2024 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने करदाताओं को राहत देने के लिए कई अहम घोषणाएँ कीं। खासकर, नई कर व्यवस्था के तहत 7 लाख रुपये तक की आय को पूरी तरह कर मुक्त कर दिया गया है। लेकिन इसके साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि कुछ कटौतियों और छूटों का लाभ उठाने पर 12 लाख रुपये तक की आय पर भी कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। यह सुनकर आम करदाता के मन में एक स्वाभाविक सवाल उठता है कि यदि 12 लाख तक की आय वास्तव में कर मुक्त हो सकती है, तो फिर टैक्स स्लैब प्रणाली को बनाए रखने की क्या जरूरत है? क्या यह प्रणाली करदाताओं के लिए एक सरल विकल्प है, या फिर उन्हें भ्रमित करने वाली जटिल संरचना?
भारत में कराधान प्रणाली प्रगतिशील कर ढांचे पर आधारित है, जहाँ अधिक कमाने वालों से अधिक कर वसूला जाता है। यही कारण है कि सरकार ने अलग-अलग टैक्स स्लैब बनाए हैं, जिनके तहत विभिन्न आय वर्गों पर अलग-अलग दरों से कर लगाया जाता है। लेकिन 12 लाख तक की आय को कर मुक्त करने की बात सीधे तौर पर लागू नहीं होती, बल्कि यह विभिन्न छूटों और कटौतियों पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए, स्टैंडर्ड डिडक्शन, सेक्शन 80C और अन्य टैक्स सेविंग इंस्ट्रूमेंट्स के जरिए कर योग्य आय को घटाया जा सकता है।
हालाँकि, यह पूरी प्रक्रिया उन लोगों के लिए जटिल और भ्रमित करने वाली हो सकती है, जो कर योजना (Tax Planning) के बारे में अधिक जानकारी नहीं रखते। कई करदाता पूरी जानकारी के अभाव में अपनी आय पर अधिक कर चुका देते हैं, जबकि सही योजनाओं का लाभ उठाकर वे अपनी कर देनदारी को काफी हद तक कम कर सकते हैं। यह व्यवस्था उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो कर नियोजन में रुचि लेते हैं, लेकिन आम करदाता के लिए इसे पूरी तरह समझना मुश्किल हो सकता है।
टैक्स स्लैब प्रणाली को बनाए रखने का सरकार का उद्देश्य केवल कर संग्रह बढ़ाना नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि लोग बचत और निवेश की आदत डालें। सरकार विभिन्न कर प्रोत्साहनों के जरिए जनता को भविष्य के लिए वित्तीय रूप से अधिक सुरक्षित बनाने का प्रयास कर रही है। यदि सीधे 12 लाख तक की आय को कर मुक्त कर दिया जाए, तो कर संग्रह में कमी आ सकती है, जिससे सरकारी परियोजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं के लिए धन जुटाने में दिक्कत हो सकती है।
इस स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या सरकार को कर प्रणाली को और सरल बनाने की जरूरत है? क्या टैक्स स्लैब को कम किया जाना चाहिए या फिर टैक्स छूट और कटौतियों की जटिलता को समाप्त कर दिया जाना चाहिए?
भविष्य में भारत को एक सरल, पारदर्शी और करदाता के अनुकूल कर प्रणाली की ओर बढ़ना चाहिए, जिससे आम करदाता को किसी जटिल गणना में उलझे बिना अपनी कर देनदारी का सही आकलन करने में आसानी हो। जब तक यह नहीं होता, तब तक आम करदाता के लिए “12 लाख तक की आय कर मुक्त” का दावा केवल एक तकनीकी गणना का खेल ही रहेगा, जिसे समझना और लागू करना हर किसी के लिए आसान नहीं होगा।
12 लाख तक आय कर मुक्त