सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल परिसर के शोधकेन्द्र द्वारा संचालित प्राक्शोधपाठ्यक्रम के अन्तर्गत व्याख्यान शिरीषदेव पुजारी ने भारतीय ज्ञानपरम्परा में विज्ञान विषय को लेकर संस्कृतभारती के अखिल भारतीय पत्राचार प्रमुख ने शोधपरख विचार व्यक्त किया। आपने संस्कृतभाषा में लिखे गये वेदपुराण रामायण महाभारत आदि ग्रन्थो में विज्ञान सम्बन्धी तत्व को उजागर किया। आपने बताया कि भारतीय अनुसन्धान की परम्परा सनातन है शाश्वत है समाजोपयोगी रही है।
हमारे यहाँ समाज की आवश्यकता को ध्यान में रखकर ही ऋषियों ने अनुसन्धान कर विचारदृष्टि को जन्म दिया। जब तक अनुसन्धान समाज के लिए उपयोगी नहीं होगा तब तक उस शोध का महत्व ही नही है वह केवल व्यर्थ ही है। हम भारतीयो की अनुसन्धान की परम्परा सदियों पुरानी है। समूचा विश्व भारतीय अनुसन्धान पद्धति और भारतीय अनुसन्धाताओ की ओर ही विश्वास लिये हुए है। जब तक संस्कृत में लिखे शास्त्रीयग्रन्थो का गहन अध्ययन कर तत्व को नही समझा जाएगा समाज को अवगत नही कराया जाएगा तब तक उनकी कोई उपयोगिता नही होगी।
अत एव संस्कृत के अध्येताओ को अवान्तर विषयो के साथ अनुसन्धान कार्य करना होगा तभी अनुसन्धान का विकास हो सकेगा। अध्यक्षता करते हुए प्रो गोविन्दपाण्डेय ने बताया की अनुसन्धान भारतीय ज्ञान से ओत प्रोत है विद्यार्थियों को इस ओर ध्यान तथा लगन से काम करना चाहिए। शोधकेन्द् समन्वयक प्रो कृपाशंकर शर्मा ने अनुसन्धान के मुख्यबिन्दुओ तथा शोध की दिशा को उद्घाटित किया। प्रो सोमनाथ साहू ने धन्यवाद तथा संचालन डा कृष्णकान्त तिहारी ने किया।

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