सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: आईआईटी इंदौर और आईआईटी हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने ताजमहल की वास्तुकला और कछुए के खोल से प्रेरित होकर दो इको-फ्रेंडली जियोग्रिड विकसित किए हैं। ये जियोग्रिड बाजार में उपलब्ध अन्य जियोग्रिड से अधिक मजबूत हैं और रिसाइकल्ड प्लास्टिक से बने होने के कारण पर्यावरण के अनुकूल भी हैं। इनका उपयोग सिविल इंजीनियरिंग के विभिन्न क्षेत्रों में किया जा सकता है, जिसमें फ्लेक्सिबल फुटपाथ, हाइवे निर्माण, एयरपोर्ट रनवे और रेलवे ट्रैक बेड को बेहतर बनाना शामिल है।
यह जियोग्रिड टनल निर्माण, अंडरग्राउंड माइनिंग, फाउंडेशन, तटबंध और ढलानों को मजबूत करने के साथ-साथ रिटेनिंग वाल, पुल और नदी किनारों की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाएगा। इस तकनीक का विकास संयुक्त राष्ट्र के स्थायी विकास लक्ष्यों के अनुरूप किया गया है और यह जलवायु परिवर्तन, संसाधनों की कमी और कचरा प्रबंधन के मुद्दों का समाधान करने में मदद करेगा।
इस परियोजना का नेतृत्व इंदौर से डॉ. बाडिगा रामू कर रहे हैं, जिनके साथ बीएस प्रवीण और पी साई मेघना शामिल हैं। टीम ने इस जियोग्रिड के पेटेंट के लिए भी आवेदन दिया है, जिससे टिकाऊ सिविल इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा मिलेगा।