सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : डिजिटल स्मारिका का QR स्कैन कर किया विमोचन। इस महीने की 4 तारीख को भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान भोपाल का चौथा डिग्री वितरण समारोह (दीक्षांत समारोह) सिविल सभागार में हुआ। इस कार्यक्रम में साल 2025 में कंप्यूटर विज्ञान, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के 182 छात्रों को बीटेक की डिग्री दी गई। जिसमें 47 छात्र ईसीई के, 66 छात्र आईटी के और 69 छात्र सीएसई के रहे।
हर विभाग के जीजीपीए के आधार पर प्रथम एवं द्वितीय स्थान पर रहने वाले छात्रों को गोल्ड एवं सिल्वर पदक प्रदान किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य मेहमानों ने दीप जलाकर और देवी सरस्वती की वंदना करके किया।

इसके बाद,ट्रिपल आईटी भोपाल के निदेशक प्रोफेसर आशुतोष कुमार सिंह द्वारा उद्घोषणा दी गई तथा सभी छात्रों और मुख्य मेहमानों को संबोधित किया जिसमें उन्होंने कहा कि–अपने संबोधन में निदेशक ने संस्थान की हालिया उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कॉलेज को नई जमीन आवंटित की गई है, जिस पर अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ विकसित की जाएँगी।

विद्यार्थियों की सफलताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि छात्रों ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में संस्थान का नाम रोशन किया है।
साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि कॉलेज एआई और अर्धचालक प्रौद्योगिकी पर अनुसंधान कर रहा है, जिससे न केवल विद्यार्थियों को अत्याधुनिक तकनीकी अनुभव मिलेगा, बल्कि देश के वैज्ञानिक विकास में भी संस्थान का योगदान बढ़ेगा।

जिसके बाद, अपनी-अपनी शाखा में पहला एवं दूसरा स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों को पदक दिए गए। इसी कड़ी में, चाँदी का पदक ईसीई में कुंदन कुमार गुप्ता को, आई टी में जिया राठौर को एवं सी एस ई में ईशान कुमार को मिला। तथा ईसीई में स्वर्ण पदक गौरव महेश को, आई टी में मंजीत पाठक को, एवं सी एस ई में पदक प्रांजल दुबे को मिला तथा सबसे ज़्यादा अच्छे अंक प्राप्त करने वाले प्रांजल दुबे को एक और स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ। जिसके बाद सभी छात्रों को डिग्री दी गई। फिर, सभी विद्यार्थियों ने सभी के साथ खड़े होकर समाज और देश की सेवा करने की शपथ ली। इस पल ने समारोह को इतिहास में दर्ज कर दिया।
इसके बाद, सम्माननिय अतिथि यूआईडी आरजीपीवी के निदेशक प्रोफेसर एस.एस. भदौरिया द्वारा भाषण दिया गया, जिसमें उन्होंने कहा।
अपने उद्बोधन में वक्ता ने वर्तमान युग को “सूचान प्रौद्योगिकी और अनंत संभावनाओं का युग” बताया।
उन्होंने कहा कि आज का समय ऐसा दौर है, जहाँ नवाचार और तकनीक के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति अपने सपनों को साकार कर सकता है।जो युवा इस युग की शक्ति को समझकर इसे सकारात्मक दिशा देंगे, वही आने वाले भारत के निर्माता होंगे।

प्रोफेसर एस.एस. भदौरिया के भाषण के बाद, सम्मानित मेहमान, वालेओ के निदेशक सुजीत महापात्रो द्वारा भाषण दिया गया, जिसमें उन्होंने विद्यार्थियों की मेहनत, लगन और कामयाबी की तारीफ की तथा
उन्होंने इस समय को एक नए युग की शुरुआत बताया उन्होंने यह भी बताया कि सफलता की कोई परिभाषा नहीं होती सिर्फ आत्म संतोष है।
सी.एस.के. महापात्रों के द्वारा दिए गए भाषण के बाद, आदरणीय मेहमान ट्रिपल आईटी ग्वालियर के निदेशक प्रोफेसर एस. एन. सिंह द्वारा संबोधन प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने सभी छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि
उन्होंने नए नजरिए से सोचने की संदेश दिया।एवं मार्गदर्शन किया।
प्रोफेसर एस. एन. सिंह के भाषण के बाद, प्रशासनिक परिषद की अध्यक्ष कविता खन्ना जी ने सभी छात्रों एवं मेहमानों को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने बच्चों को आगे बढ़ने का संदेश दिया तथा
मुख्य अतिथि,मुख्य सचिव अनुराग जैन जी, ने अपने भाषण में सबसे पहले सभी को धन्यवाद दिया। उसके बाद, उन्होंने बच्चों का उत्साह बढ़ाने के लिए अपने समय की एक लाइन का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा “टेंपो हाई है”। इसके बाद उन्होंने पुनः सभी को धन्यवाद दिया और सभी बच्चों की
सराहना भी की।

इसके बाद उन्होंने कहा कि छात्रों को अपने परिवार, समाज, और अपने शिक्षकों की दी गई संरचना और मार्गदर्शन को हमेशा याद रखना चाहिए। यह डिग्री उनके जीवन में केवल एक शुरुआत है। अब असली समय है अपने आप को साबित करने का।
इसके बाद उन्होंने कई बड़े नामों का जिक्र किया, जैसे मार्क ज़करबर्ग, मिशेलिन डेल, और स्टीव जॉब्स, जिनके पास कोई डिग्री नहीं थी, लेकिन वे अपनी कंपनियों के मालिक बन गए। डिग्री केवल आपको एक अच्छी शुरुआत प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि वास्तव में वही चीज़ मूल्यवान होती है, जिसे हम कर्म के रूप में करते हैं। अतः स्वयं को निरंतर विकसित करते रहना चाहिए, प्रमाणपत्र प्राप्त करते रहना चाहिए और जीवनभर सीखते रहना चाहिए। उन्होंने अपनी उस दर्शनशास्त्र का भी उल्लेख किया, जिसका ज़िक्र शिव खेड़ा जी की पुस्तक में मिलता है कि कोई भी व्यक्ति वही होता है, जो उसके पूर्व अनुभव, शिक्षा और परिवेश के समन्वय का परिणाम होता है।
इसके बाद उन्होंने यह भी समझाया कि सीखने और वास्तविक कार्य करने में अंतर होता है, और वह अंतर केवल तब समझ आता है जब कोई व्यक्ति किसी कंपनी में व्यावहारिक रूप से कार्य करता है।
उन्होंने जैन जी का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हीं के प्रयासों की बदौलत हमारा देश तीव्र गति से विकास की ओर अग्रसर है। विकसित भारत का जो लक्ष्य वर्ष 2047 तक निर्धारित किया गया है, उसे साकार करने में जैन जी का योगदान अत्यंत महत्त्वपूर्ण होगा। उन्होंने यह भी व्यक्त किया कि वे इस डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के इस समारोह का हिस्सा बनकर गर्व और हर्ष का अनुभव कर रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि एक विकसित राष्ट्र का हिस्सा होना हम सभी के लिए उत्सव का विषय है और हमें इसे हृदय से मनाना चाहिए।
प्रौद्योगिकी के वास्तविक जीवन में उपयोग को ही उन्होंने सच्चा ज्ञान बताया। उनके अनुसार, असली ज्ञान एक पूरे समाज और समुदाय से निर्मित होता है, जहाँ विभिन्न प्रकार की विद्या और अनुभव छोटे-छोटे हिस्सों के रूप में उपस्थित रहते हैं। अंत में उन्होंने एक कहावत का उल्लेख किया—” दिग्गजों के कंधों पर खड़े होकर,” जिसका अभिप्राय है कि छोटे-छोटे योगदान भी किसी बड़े कार्य को सफल बनाने में सहायक होते हैं।
कार्यक्रम के समापन की ओर ने आभार प्रकट करते हुए सभी उपस्थित लोगों को धन्यवाद कहा, जिसके बाद प्रोफेसर आशुतोष जी ने डिग्री वितरण समारोह का औपचारिक रूप से समापन किया। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिसके बाद डिग्री समारोह खत्म हुआ एवं सभी मेहमान चले गए।
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