सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारतीय आर्थिक संघ (आईईए) का 108वां वार्षिक सम्मेलन चेन्नई स्थित वेल्स इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड एडवांस्ड स्टडीज़ में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस सम्मेलन ने बदलती वैश्विक और घरेलू चुनौतियों के बीच भारत की विकास यात्रा को आकार देने में अर्थशास्त्रियों की महत्वपूर्ण भूमिका को पुनः रेखांकित किया। 27 से 29 दिसंबर 2025 तक आयोजित इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर के 400 से अधिक उच्च शिक्षा संस्थानों से आए 1,500 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनके साथ-साथ प्रख्यात अर्थशास्त्री, नीति-निर्माता और अंतरराष्ट्रीय विद्वान भी उपस्थित रहे, जिससे यह सम्मेलन देश में अर्थशास्त्रियों का सबसे बड़ा शैक्षणिक समागम बन गया।
सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष प्रो. एस. महेंद्र देव ने किया, जबकि समापन संबोधन तमिलनाडु के माननीय राज्यपाल थिरु आर. एन. रवि द्वारा दिया गया।
उद्घटन सत्र: सुधार, लचीलापन और विकास
अपने उद्घाटन भाषण में प्रो. एस. महेंद्र देव ने कहा कि निवेश और निर्यात भारत की आर्थिक वृद्धि के प्रमुख प्रेरक बने हुए हैं, जिन्हें वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), आयकर और सीमा शुल्क सुधारों जैसे संरचनात्मक सुधारों तथा लचीले मौद्रिक नीति ढांचे का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने महिला कार्यबल भागीदारी, शहरीकरण, व्यापार करने में सुगमता तथा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में असमानताओं को कम करने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत (रेजिलिएंट) है और आने वाले दशकों में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में अपनी हिस्सेदारी को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने के लिए अच्छी स्थिति में है।
उद्घाटन सत्र के दौरान, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने आईआईटी बॉम्बे की प्रो. नयनिका धुग्गल को अनिवार्य कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व पर उनके शोध के लिए सर्वश्रेष्ठ शोध-प्रबंध (बेस्ट थीसिस) पुरस्कार प्रदान किया। इसके साथ उन्हें 50,000 रुपये की नकद राशि भी प्रदान की गई।
भारत की आर्थिक दिशा पर प्रख्यात विचार
उद्घाटन समारोह में कई प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री और शैक्षणिक नेतृत्वकर्ता उपस्थित रहे, जिनमें प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सी. रंगराजन; अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. कौशिक बसु; आईईए के संरक्षक एवं वीआईटी के संस्थापक-कुलपति डॉ. जी. विश्वनाथन; आईईए के अध्यक्ष प्रो. ए. डी. एन. बाजपेयी; आईईए के महासचिव प्रो. रविंद्र के. भ्रमे; आईईए के सम्मेलन अध्यक्ष एवं VISTAS के प्रो-चांसलर प्रो. जोथि मुरुगन; वेल्स ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस एंड कंपनियों के अध्यक्ष एवं आईईए के मुख्य संरक्षक डॉ. ईशरी के. गणेश; तथा तमिलनाडु सरकार के श्रम कल्याण एवं कौशल विकास मंत्री माननीय थिरु सी. वी. गणेशन शामिल थे।
सभा को संबोधित करते हुए थिरु सी. वी. गणेशन ने तमिलनाडु की 11.9 प्रतिशत विकास दर पर प्रकाश डाला, जिसके साथ राज्य औद्योगिक विकास में प्रथम स्थान पर है। उन्होंने बताया कि वेल्स और वीआईटी जैसे निजी शैक्षणिक संस्थानों ने लगभग 2.97 लाख रोजगार सृजित करने में योगदान दिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में महिला कार्यबल भागीदारी 43 प्रतिशत है, जो भारत में सबसे अधिक में से एक है। यह शिक्षा और रोजगार को आर्थिक विकास के प्रमुख इंजन के रूप में दर्शाता है।
डॉ. सी. रंगराजन ने 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के दृष्टिकोण पर बात की, जिसमें प्रति व्यक्ति आय 18,000 अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य रखा गया है। वहीं डॉ. कौशिक बसु ने आईईए से आह्वान किया कि वह तीव्र तकनीकी परिवर्तनों और वैश्विक आर्थिक बदलावों का सामना करने के लिए अर्थशास्त्रियों को सक्रिय रूप से तैयार करे।
समापन संबोधन: समावेशी विकास और सामाजिक पूंजी
समापन संबोधन में तमिलनाडु के माननीय राज्यपाल थिरु आर. एन. रवि ने कहा,
वरिष्ठ नागरिक बोझ नहीं हैं; वे राष्ट्र की अमूल्य संपत्ति हैं।
समावेशी आर्थिक पहलों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि मुद्रा योजना से 52 लाख लोगों को लाभ मिला है, जिसमें से अकेले तमिलनाडु में 3.25 लाख करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि भारत 2021 से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था रहा है, 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है और अब वैश्विक स्तर पर शीर्ष तीन स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्रों में शामिल है। यह भारत के समावेशी विकास मॉडल की मजबूती को दर्शाता है।
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