सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद में नव-नियुक्त तकनीकी कर्मचारियों के लिए “मार्गदर्शन ओरिएंटेशन” कार्यक्रम के समापन समारोह का आयोजन भारतीय गुणवत्ता परिषद और मानव रचना यूनिवर्सिटी के द्वारा संयुक्त रूप से बीएमएचआरसी भोपाल में किया गया।समापन समारोह में आईसीएमआर के उप-महानिदेशक (प्रशासन) जगदीश राजेश ने कहा कि ज़िंदगी के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन जरूरी है। उन्होने कहा कि मार्गदर्शन का मुख्य उद्देश्य आईसीएमआर के नव-नियुक्त तकनीकी कर्मचारियों में प्रशासकीय कौशल, वित्त, वैज्ञानिक नेतृत्व , गुणवत्ता और परियोजना प्रबंधन का विकास करना है। गौरतलब है कि आईसीएमआर संस्थान द्वारा पिछले नौ माह से नव-नियुक्त कर्मचारियों के लिए जारी कौशल उन्नयन प्रशिक्षण सत्र की सभी जगह सराहना की जा रही है और अब आईसीएमआर की इस पहल के बाद अन्य संस्थानों में भी इसी तरह के कौशल प्रशिक्षण दिये जाने पर विचार होने लगा है। क्योंकि ऐसे प्रशिक्षण सत्र प्रतिभागियों के लिए व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक क्षेत्र में आगे बढ़ने में मददगार साबित होते हैं।

इस अवसर पर बीएमएचआरसी संस्थान की प्रभारी निदेशक मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि ज़िंदगी सबसे बड़ी शिक्षक है। जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते है। यदि कोई एक व्यक्ति भी अपने कर्म पथ पर अग्रसर रहकर सकारात्मक बदलाव की सोचे तो देश बदल सकता है। मैं निश्चित रूप से कह सकती हूँ कि पूरे देश के आईसीएमआर संस्थानों से चुनकर आए नवनियुक्त कर्मचारियों ने सीखने की प्रक्रिया में गहन अनुभूति का अनुभव किया होगा। इस कार्यशाला के माध्यम से सभी प्रतिभागियों में सहभागिता, नेतृत्व, सामंजस्य और सहयोग की भावना का विकास हुआ होगा।


डॉ दीप्ति दबास हजारिका, डीन, मानव रचना यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली ने अपने उद्बोधन में कहा कि कर्मचारियों के सर्वांगीण विकास के लिए इस तरह के कार्यक्रम आयोजित होते रहना चाहिए। मार्गदर्शन का मतलब गाइडेंस यानी सही रास्ते पर चलना है। जीवन जीने का सही तरीका गुणवत्तापूर्ण जीवन जीना है। आगे उन्होने कहा कि इस कार्यक्रम में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रतिभागियों ने कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए व्यवहारिकता का पाठ भी अवश्य ही सीखा होगा।

भारतीय गुणवत्ता परिषद के सयुंक्त निदेशक सी एस शर्मा ने कहा कि आईसीएमआर संस्थान ने पिछले नौ माह में नौ बैच के माध्यम से 290 कर्मयोगियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया है। यही आज का नवाचार है। में दावे से कह सकता हूँ कि इन सभी प्रतिभागियों को 21 दिन के सत्र में जो ऊर्जा प्राप्त हुई होगी, वो ये कभी नहीं भूल पाएंगे। इस मार्गदर्शन प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएमआर के सभी कर्मचारियों ने क्षमता निर्माण, ज्ञान, कौशल व्यवहार सभी कुछ सीखा। पिछले 1 माह में जो भी अनुभवी शिक्षक उन्हे सिखाने आए, उन्होने जामवंत की भूमिका निभाते हुए आपके अंदर के अंतर्मन को जगाया। यह ट्रेनिंग उन्हे पूरे जीवन में मार्गदर्शन प्रदान करेगी। समस्याएँ तो जीवन में सभी जगह हैं लेकिन महत्वपूर्ण यह है हम समाधान का हिस्सा बनें।

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