सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : महाराष्ट्र में हाल ही में हिंदी भाषा को लेकर कुछ राजनीतिक दलों और नेताओं द्वारा दिए गए विवादास्पद और दुर्भाग्यपूर्ण बयानों पर भारत तिब्बत सहयोग मंच के युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अर्पित मुदगल ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा: “हिंदी केवल एक भाषा नहीं है, यह भारत की आत्मा, संस्कृति और संवैधानिक पहचान है। हिंदी का विरोध करना, भारत की एकता पर हमला करना है।”
अर्पित मुदगल ने कहा कि कुछ नेताओं द्वारा हिंदी को “थोपा जा रहा है” कहकर जो ज़हर फैलाया जा रहा है, वह भारत की भाषाई एकता को तोड़ने का षड्यंत्र है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि: “हम देश की सभी भाषाओं का सम्मान करते हैं, परंतु हिंदी का अपमान अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भारत का संविधान हिंदी को राजभाषा मानता है — इसे थोपना नहीं, जोड़ना कहते हैं।”
उन्होंने महाराष्ट्र की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे महापुरुषों की भूमि से हिंदी का विरोध करना उनके मूल्यों और भारत की अखंडता के विरुद्ध है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि:
“हिंदी विरोधी राजनीति करने वालों को जनता इतिहास के कूड़ेदान में फेंक देगी। हम राष्ट्रवादियों की प्राथमिकता भारत की एकता है, न कि भाषाई वोटबैंक।” अंत में अर्पित मुदगल ने युवाओं से आह्वान किया कि वे हिंदी के समर्थन में आगे आएं, और देश को भाषाओं में बांटने वाली राजनीति का पुरज़ोर विरोध करें।
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