सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस  /   आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल  :  मेटल किंग और अरबपति कारोबारी अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाला वेदांता ग्रुप अपने डीमर्जर प्लान को लेकर एक बार फिर मुश्किलों में फंसता नजर आ रहा है। कंपनी ने 2023 में घोषणा की थी कि वह अपनी इकाइयों को अलग-अलग सूचीबद्ध कंपनियों में बांटेगी, जिसमें एल्युमीनियम, तेल एवं गैस, बिजली और इस्पात जैसे कारोबार शामिल होंगे। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत वेदांता को होल्डिंग कंपनी बनाना प्रस्तावित है।

शुरुआत में यह प्रक्रिया 2024 के अंत तक पूरी करने की योजना थी, लेकिन इसे मार्च 2025 तक बढ़ाया गया और फिर सितंबर तक संशोधित किया गया। अब खबर है कि कानूनी और वित्तीय जटिलताओं की वजह से एक बार फिर इसकी डेडलाइन बढ़ सकती है।

कंपनी की मुश्किलें उस समय और बढ़ गईं जब उसने दिवालिया जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण में सबसे ऊंची बोली लगाई। लगभग ₹17,000 करोड़ की इस डील को अभी तक लेंडर्स की मंजूरी नहीं मिली है। वेदांता को इस सौदे के तहत ₹3,800 करोड़ अग्रिम  देने होंगे और बाकी रकम अगले पांच साल में चुकानी होगी। लेकिन चूंकि जयप्रकाश एसोसिएट्स का बिजनेस वेदांता की मौजूदा इकाइयों से बिल्कुल अलग है, इसलिए क्रेडिट रिसर्च एजेंसियां इससे जुड़े जोखिमों को लेकर सतर्क हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर डिमर्जर में और देरी होती है तो इसका असर शेयरधारकों के भरोसे और कंपनी की रणनीतिक दिशा दोनों पर पड़ेगा। निवेशकों को अब अगली समयसीमा पर नजर है, जो तय करेगी कि यह महत्वाकांक्षी योजना आगे बढ़ेगी या फिर एक बार फिर टल जाएगी।

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