सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन को सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के रूप में नई पहचान दिलाते हुए एक ऐतिहासिक पहल की है। यह निर्णय न केवल उज्जैन की सांस्कृतिक और शैक्षिक विरासत को सम्मानित करता है, बल्कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था में एक नई ऊर्जा का संचार करता है।

मुख्यमंत्री ने यह घोषणा 30 मार्च 2025 को विक्रम विश्वविद्यालय के 29वें दीक्षांत समारोह में की थी। इसके बाद कार्यपरिषद सदस्य राजेश सिंह कुशवाह की पहल पर विश्वविद्यालय में आपात बैठक बुलाकर नाम परिवर्तन का प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव को राज्य सरकार ने 4 अगस्त 2025 को विधानसभा में विधेयक के रूप में पारित कर दिया। अब राज्यपाल की स्वीकृति के पश्चात यह नाम परिवर्तन विधिवत प्रभावी हो जाएगा।
विक्रम विश्वविद्यालय की स्थापना 1 मार्च 1957 को हुई थी और इसका नाम प्राचीन शासक सम्राट विक्रमादित्य की गौरवगाथा से जुड़ा है। यह विश्वविद्यालय सदियों से शिक्षा का केंद्र रहा है, जहां देश के प्रतिष्ठित विद्वान और राष्ट्रनायक संबोधित करते रहे हैं।
कार्यपरिषद सदस्य, कुलगुरु अर्पण भारद्वाज, और विश्वविद्यालय परिवार ने मुख्यमंत्री के इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए हर्ष और गर्व प्रकट किया है। यह नामकरण उज्जैन को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक सशक्त कदम है।
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