सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस  /  आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल   /   नई दिल्ली   :  आज हरित क्रांति के जनक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन की जयंती है। जिस भारत को कभी अमेरिका से गेहूं मंगवाना पड़ता था, आज वही देश अनाज के मामले में आत्मनिर्भर है। यह संभव हुआ हरित क्रांति के कारण, जिसके पीछे सबसे बड़ा नाम एम.एस. स्वामीनाथन का है।

साल 1965 में भारत पाकिस्तान से युद्ध लड़ रहा था। दूसरी ओर लगातार दो सालों से सूखा पड़ा था, जिससे खेती चौपट हो गई थी। भारत की गेहूं की जरूरतें अमेरिका से पूरी होती थीं, लेकिन उस वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने गेहूं की आपूर्ति रोकने की धमकी दी।

तब देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अपने पैरों पर खड़ा होगा। इसी दौरान एम.एस. स्वामीनाथन, नॉर्मन बोरलॉग के सहयोग से उन्नत बीजों की खोज और नई कृषि तकनीकों के साथ हरित क्रांति की शुरुआत की।

इस क्रांति ने भारत को खाद्यान्न संकट से उबारा और देश गेहूं उत्पादन में आत्मनिर्भर बना। आज भारत न केवल खुद की जरूरतें पूरी करता है, बल्कि गेहूं का निर्यात भी करता है।

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