1. MPC ने रेपो दर स्थिर रखी
6 अगस्त 2025 को RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने नीति रेपो दर 5.50% पर स्थिर रखी और नीति रुख को ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा। यह निर्णय व्यापक रूप से अपेक्षित था, क्योंकि जून में पहले से ही 50 आधार अंक की कटौती की गई थी और सभी छह सदस्यों ने किसी कटौती का समर्थन नहीं किया
2. मुद्रास्फीति पूर्वानुमान में भारी गिरावट
RBI ने FY 2025‑26 की CPI मुद्रास्फीति का अनुमान 3.1% (पिछले अनुमान 3.7%) रखा है। जून में यह आंकड़ा 2.1% पर था—छह वर्ष में न्यूनतम स्तर
3. GDP वृद्धि पूर्वानुमान अपरिवर्तित
RBI ने विकास दर का अनुमान 6.5% पर बरकरार रखा है। MPC ने स्पष्ट किया कि 6.7% से संशोधित कर 6.5% किया गया था—लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं और अमेरिकी टैरिफ तनावों को ध्यान में रखते हुए इस स्तर को अपरिवर्तित रखा गया है
4. अमेरिकी टैरिफ असर का विवेकपूर्ण आकलन
ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर लगाए गए 25% टैरिफ को RBI ने ‘जनवरी 2025 की कटौती के असर की पूरी जांच के बिना आगे बढ़ना अनुचित’ कहा। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वर्तमान में टैरिफ के प्रभाव को पूर्वानुमान में शामिल करना “बहुत कठिन” है क्योंकि असर स्पष्ट नहीं है
5. नीतिगत ढ़ांचा: संतुलन और संयम
MPC ने मौजूदा नीति को “मापित विराम” (measured pause) कहा—जिसका उद्देश्य अब तक किए गए 100 bps कटौती का प्रभाव पूरे बैंकिंग सिस्टम में व्याप्त होने देना था, और भविष्य के लिए नीति विकल्प को खुला रखना था
6. वैश्विक जोखिम—टैरीफ, व्यापार तनाव और पूंजी बहिर्गमन
टीम ने वैश्विक व्यापार तनाव, अमेरिकी टैरिफ, रुपया दबाव, और विदेशी पूंजी वापसी जैसे जोखिमों को प्राथमिकता दी है। अर्थशास्त्री इस बात पर सावधानी बरत रहे हैं कि आगे की दर में कटौती केवल तभी हो सकती है यदि अर्थव्यवस्था में प्रमुख मंदी दिखाई दे
✍ निष्कर्ष
RBI की यह नीति स्पष्ट संकेत देती है कि मौजूदा चरण में विकास का समर्थन और मुद्रास्फीति नियंत्रण दोनों पर बराबर ध्यान दिया जाएगा। यह आंदोलनोत्सव और खर्च बढ़ने वाले सण अवधि के दृष्टिगत महत्त्वपूर्ण कदम है।
यह नीतिगत संयम दर्शाता है कि RBI दृढ़ और स्वतंत्र नीतिकार है—जो अल्पकालिक दबावों के बजाय दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता व नियंत्रण को प्राथमिकता देता है।
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