सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस  /   आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल   : भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर टैरिफ लगाने के फैसले की दुनियाभर में चर्चा हो रही है। अमेरिकी सांसदों ने इस कदम का विरोध करते हुए इसे अमेरिकी हितों के खिलाफ बताया है, लेकिन ट्रंप अपने रुख पर अडिग हैं और भारत की रूसी तेल खरीद को टैरिफ का मुख्य कारण ठहरा रहे हैं।

इसी बीच ट्रंप के शीर्ष आर्थिक सलाहकार और अमेरिकी राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के निदेशक केविन हैसेट ने भारत सरकार को सीधी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर भारत रूसी तेल के व्यापार पर लगाम लगाने में विफल रहता है तो अमेरिका किसी भी हालत में भारत पर लगाए गए टैरिफ नहीं हटाएगा। यह बयान भारत-अमेरिका के बीच चल रहे टैरिफ विवाद को और गंभीर बना सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन का यह दबाव वैश्विक ऊर्जा व्यापार पर बड़ा असर डाल सकता है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और रूस सस्ते कच्चे तेल का अहम स्रोत बन चुका है। ऐसे में अमेरिकी टैरिफ भारत की अर्थव्यवस्था और वस्त्र से लेकर औद्योगिक क्षेत्र तक कई सेक्टरों को प्रभावित कर सकता है।

यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत सरकार इस दबाव का कैसे जवाब देती है और आने वाले दिनों में व्यापारिक रिश्तों की दिशा किस ओर जाती है।

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