भारत–पाकिस्तान संबंध हमेशा से जटिल और संवेदनशील रहे हैं। हाल ही में कांग्रेस सांसद और विदेश मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष डॉ. शशि थरूर ने यह स्पष्ट कर दिया कि मई 2025 में भारत–पाकिस्तान सीमा पर जो संघर्षविराम लागू हुआ, उसका कारण किसी बाहरी मध्यस्थता नहीं, बल्कि भारत द्वारा की गई सटीक सैन्य कार्रवाई थी। यह बयान न केवल अमेरिकी दावों का प्रतिवाद करता है, बल्कि भारत की विदेश नीति और सामरिक संप्रभुता पर भी गहरी रोशनी डालता है।

1. ट्रम्प के दावे बनाम जमीनी सच्चाई

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में यह दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच सीधी बातचीत कराकर युद्ध टलवाया। उनके अनुसार, यदि उनकी मध्यस्थता न होती तो “परमाणु युद्ध” हो सकता था।
थरूर का उत्तर साफ था—यह दावा तथ्यों से परे है। वास्तविकता यह है कि 9–10 मई की रात भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत पाकिस्तान-प्रेरित आतंकवाद के खिलाफ सटीक सैन्य हमले किए। इन हमलों ने पाकिस्तान को मजबूर किया कि वह DGMO स्तर पर भारत से संपर्क करे और संघर्षविराम लागू करे। यह पूरी प्रक्रिया भारत की पहल और भारत की शक्ति पर आधारित थी, न कि किसी बाहरी शक्ति के दबाव पर।

2. भारत की विदेश नीति की परंपरा

भारत ने हमेशा यह रुख अपनाया है कि भारत–पाकिस्तान संबंधों में किसी तीसरे पक्ष का स्थान नहीं है। चाहे वह 1972 का शिमला समझौता हो या 1999 का लाहौर समझौता, भारत का रुख स्पष्ट रहा है—“मुद्दे द्विपक्षीय हैं और इन्हें द्विपक्षीय स्तर पर ही सुलझाया जाएगा।”
थरूर का बयान इसी नीति की पुष्टि करता है। यह भारत की संप्रभुता और आत्मनिर्भरता का प्रतिरूप है।

3. अमेरिका की ‘कथानक राजनीति’ और भारत की प्रतिक्रिया

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में शक्तिशाली देशों का एक प्रयास रहता है कि वे वैश्विक संकटों में अपनी भूमिका को निर्णायक बताएं। डोनाल्ड ट्रम्प का दावा इसी प्रवृत्ति का हिस्सा है।
लेकिन थरूर का प्रतिवाद भारत की परिपक्व कूटनीति को दर्शाता है। उन्होंने न केवल अमेरिका को वास्तविकता का आईना दिखाया, बल्कि यह भी साबित किया कि भारत अब किसी भी “बाहरी कथा” (external narrative) पर निर्भर नहीं है।

4. जे.डी. वैंस और अमेरिकी परिप्रेक्ष्य

थरूर की अमेरिका यात्रा के दौरान उपराष्ट्रपति जे.डी. वैंस ने भी स्वीकार किया कि भारत–पाकिस्तान संबंधों में किसी भी प्रकार की मध्यस्थता का दावा अव्यावहारिक है। वैंस ने माना कि भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद “नैरेटिव जीत” (narrative victory) हासिल की—यानी दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत अपनी सुरक्षा और शांति की रणनीति खुद तय करता है।

5. पाकिस्तान की जिम्मेदारी और भारत की अपेक्षा

थरूर ने स्पष्ट किया कि अब शांति बनाए रखने का दारोमदार पाकिस्तान पर है।

सीमापार आतंकवाद को रोकना,

आतंकवादी ढांचों को तोड़ना,

और हिंसा की संस्कृति को त्यागना—
ये सभी कदम पाकिस्तान को उठाने होंगे। भारत अब पहला कदम नहीं उठाएगा। यह संकेत है कि भारत की रणनीति अब “Reactive नहीं, Proactive” है—यानी जब तक पाकिस्तान बदलाव नहीं दिखाता, भारत केवल प्रतीक्षा और मूल्यांकन करेगा।

6. ऐतिहासिक संदर्भ: बालाकोट से सिंदूर तक

2019 का बालाकोट एयरस्ट्राइक और 2025 का ऑपरेशन सिंदूर—दोनों घटनाएं यह दर्शाती हैं कि भारत अब आतंकवाद पर रणनीतिक चुप्पी नहीं, बल्कि निर्णायक जवाब देता है।
थरूर का बयान इसी निरंतरता का हिस्सा है। यह दिखाता है कि भारत केवल “संवाद” पर निर्भर नहीं है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर कार्रवाई करने से भी पीछे नहीं हटता।

निष्कर्ष

शशि थरूर का यह बयान केवल डोनाल्ड ट्रम्प के दावे का खंडन नहीं है, बल्कि भारत की विदेश नीति और सामरिक आत्मनिर्भरता का घोषणा–पत्र है। इससे यह संदेश स्पष्ट है कि भारत अब किसी भी बाहरी दबाव या कथानक पर नहीं, बल्कि अपनी शक्ति, कूटनीति और जनता की अपेक्षाओं पर आधारित फैसले करता है।

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