सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल / नई दिल्ली : प्रधानमंत्री की इकोनॉमिक एडवाइजर काउंसिल के सदस्य संजीव सान्याल ने शनिवार को कहा कि विकसित भारत के लिए हमारी न्यायिक प्रणाली सबसे बड़ी बाधा है। दिल्ली में भारतीय महाधिवक्ता सम्मेलन में उन्होंने इस पर विस्तार से चर्चा की। सम्मेलन का विषय था, “2047 में विकसित भारत के लिए भारत के कानूनी आधार की पुनर्कल्पना”।
सान्याल ने बताया कि कई कानून समस्या को हल करने की बजाय जटिल बनाते हैं। उन्होंने कोर्ट में प्रयोग होने वाले अंग्रेजों के जमाने के शब्द “माई लॉर्ड” को बदलने की सलाह दी। साथ ही, अदालतों में महीनों तक छुट्टी होने और मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने ’99-1 समस्या’ का उदाहरण देते हुए बताया कि केवल 1% लोग नियमों का गलत इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कानून इतनी जटिल होती है कि बाकी 99% ईमानदार लोग भी प्रभावित होते हैं। सान्याल ने मध्यस्थता को अनिवार्य बनाने के नियम का भी विरोध किया। उनका कहना है कि यह नियम अक्सर फेल हो जाता है और मामलों में अतिरिक्त छह महीने की देरी होती है।
साथ ही उन्होंने कहा कि भारत की कानूनी व्यवस्था में परतें और पदानुक्रम मध्ययुगीन ढांचे पर आधारित हैं। 21वीं सदी में कई मामलों में कानूनी डिग्री की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। AI और आधुनिक तकनीक की मदद से इसे सरल बनाया जा सकता है।
सान्याल का मानना है कि कानून और न्याय को समय पर लागू करना ही असली विकास की कुंजी है, न कि सिर्फ इमारतों और बुनियादी ढांचे में निवेश।
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