सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल / उज्जैन : आकाशवाणी उज्जैन की चयन प्रक्रिया के तीनों चरण पूर्ण होने के बाद सोमवार से विक्रम विश्वविद्यालय की सतत शिक्षा अध्ययनशाला परिसर में चयनित उद्घोषकों का प्रशिक्षण प्रारंभ हुआ। यह प्रशिक्षण पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें प्रतिभागियों को रेडियो प्रसारण की कार्यप्रणाली और आकाशवाणी की गौरवशाली परंपरा से अवगत कराया गया।
प्रशिक्षण के पहले दिन ही प्रतिभागियों को यह समझाया गया कि उद्घोषक केवल सूचनाएं नहीं पढ़ता, बल्कि कार्यक्रम की आत्मा को स्वर देता है। प्रशिक्षकों ने बताया कि आकाशवाणी केवल एक प्रसारण संस्था नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का माध्यम है। उद्घोषक की आवाज़ श्रोताओं के मन में विश्वास और अपनत्व पैदा करती है, और रेडियो कार्यक्रम समाज और संस्कृति से गहरे जुड़े होते हैं।

प्रशिक्षण में युव वाणी, ग्राम सभा और महिला सभा उद्घोषकों के लिए अलग-अलग सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में कार्यक्रम आरंभ से लेकर समापन तक की सम्पूर्ण प्रक्रिया समझाई गई। उदाहरण स्वरूप, उद्घोषक की आवाज़ में उत्साह और आत्मीयता प्रकट होनी चाहिए, जबकि समापन के समय गरिमा और संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। प्रत्येक कार्यक्रम के लिए भाषा की शैली भी भिन्न होती है—ग्राम सभा में सहज और ग्रामीण भाषा, महिला सभा में संवेदनशील और प्रेरक भाषा, और युव वाणी में आधुनिक और ऊर्जा से भरी भाषा का प्रयोग विशेष महत्व रखता है।
प्रशिक्षण में अनुभवी उद्घोषकों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और प्रेरणादायी बनाया। इंदौर से आए संजीव मालवीय, भोपाल केंद्र से पुरुषोत्तम और उज्जैन प्रभारी अनामिका चक्रवर्ती ने प्रतिभागियों को अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने उद्घोषक के व्यवहार, प्रसारण अनुशासन और श्रोताओं से जुड़ने के तरीकों पर विशेष प्रकाश डाला। प्रतिभागियों को बताया गया कि उज्जैन से प्रसारित सभी कार्यक्रम एफ.एम. 102.5 मेगाहर्ट्ज़ पर सुने जा सकेंगे। इन कार्यक्रमों में ग्राम सभा, महिला सभा और युव वाणी शामिल हैं, जिनके माध्यम से स्थानीय संस्कृति, भाषा और सामाजिक संदेश व्यापक स्तर पर पहुँचेंगे।
कार्यक्रम अधिकारी राजेश भट्ट ने प्रशिक्षण और आकाशवाणी की दिशा-निर्देशों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उद्घोषक कार्यक्रम की सफलता की कुंजी हैं और प्रत्येक कार्यक्रम की प्रकृति अलग होने के कारण शब्द चयन और शैली पर विशेष ध्यान देना होगा। प्रशिक्षणार्थियों का उत्साह पहले दिन ही देखने लायक था। सभी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और उद्घोषण की बारीकियां सीखने में गहरी रुचि दिखाई। आने वाले दिनों में तकनीकी प्रशिक्षण, स्टूडियो प्रबंधन और कार्यक्रम निर्माण की जानकारी भी दी जाएगी, जिससे आकाशवाणी की परंपरा और समृद्ध होगी।
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