सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नेक द्वारा ए+ ग्रेड प्राप्त श्री सत्य साई महिला महाविद्यालय,भोपाल में हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में हिन्दी विभाग द्वारा ‘हिन्दी वैभव प्रदर्शनी ‘ के अंतर्गत ‘भारतीय ज्ञान परंपरा में हिन्दी साहित्य का अवदान’ विषय पर आधारित पोस्टर प्रतियोगिता एवं पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि थीं वरिष्ठ साहित्यकार, सप्तवर्णी कला साहित्य सृजन शोध पीठ, भोपाल की निदेशक एवं प्राध्यापक हिन्दी डॉ. श्रीमती बिनय षड़ंगी राजाराम।दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। सर्वप्रथम हिन्दी विभाग में आयोजित हिन्दी वैभव प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया।
इस प्रदर्शनी में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा में हिन्दी साहित्य का अवदान’ विषयक पोस्टर प्रदर्शनी तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल स्रोत – वेद, उपनिषद् , वाल्मीकि रामायण, अध्यात्म रामायण रामचरितमानस,श्रीमद्भगवद्गीता, गीता रहस्य, श्रीमद्भागवत पुराण आदि अनेक ग्रन्थों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिससे छात्राएँ भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल स्रोत को जान सकें। भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के सहयोग से इस ग्रंथ प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। उद्घाटन के अवसर पर भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के प्रभारी सदस्य उपस्थित रहे। हिन्दी पुरस्कार वितरण समारोह का प्रारंभ हिन्दी विभागाध्यक्ष अनुपमा चौहान के स्वागत भाषण से हुआ।

महाविद्यालय की निदेशक प्रतिभा सिंह ने मुख्य अतिथि का स्वागत नन्हा पौधा भेंट कर किया। इस समारोह में हिन्दी विभाग द्वारा आयोजित पुण्यश्लोका अहिल्याबाई की 300वीं जयंती, तुलसी जयंती, मैथिलीशरण गुप्त जयंती, हिन्दी वैभव प्रदर्शनी पोस्टर प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। हिन्दी दिवस पर इस वर्ष ‘हिन्दी काव्य पांडुलिपि प्रतियोगिता’ का आयोजन भी हिन्दी विभाग द्वारा किया गया, जिसमें प्रथम पुरस्कार सुरभि मेसरा बी.ए.एल.एल.बी. पंचम समसत्र की पांडुलिपि ‘सुरभिता’, द्वितीय पुरस्कार निधि कटारे एम. ए. हिन्दी प्रथम समसत्र की पांडुलिपि ‘मेरे सियाराम’ व तृतीय पुरस्कार निक्की कुमारी बी.कॉम. प्रथम वर्ष की पांडुलिपि ‘मन का मोती’ को प्रदान किया गया।

पोस्टर प्रतियोगिता में निधि कटारे एम.ए. हिन्दी प्रथम समसत्र को प्रथम, कविता कुशवाह एम. ए. हिन्दी प्रथम समसत्र को द्वितीय, रोशनी शर्मा एम.ए. हिन्दी प्रथम समसत्र को तृतीय, सुनीता अटुदे व दीप्ति तिग्गा एम.ए. हिन्दी तृतीय समसत्र को प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किया गया। महाविद्यालय की निदेशक प्रतिभा सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि भाषा भावों की संवाहिका है। वह सीधे हृदय में उतरती है। उसे रचनात्मक स्वरूप में ढ़ालना निरंतर सीखने की प्रक्रिया द्वारा संभव है। उन्होंने सभी पुरस्कार प्राप्त छात्राओं को शुभकामनाएँ व बधाई दी।
मुख्य अतिथि बिनय षड़ंगी राजाराम ने अपने उद्बोधन में कहा कि हिन्दी हमारी संपर्क भाषा है। यह स्नेह , संवेदना तथा संस्कार की भाषा है। हिन्दी अभी विश्व में तीसरे स्थान पर है। क्योंकि आज भी कई बोलियाँ स्वयं को एक स्वतंत्र भाषा मानती हैं,पर यदि भारत में बोली जाने वाली सभी हिन्दी बोलियाँ पूर्णतया हिन्दी में सम्मिलित हो जाएँ, तो हिन्दी विश्व में प्रथम स्थान या कम से कम द्वितीय स्थान पर तो आ ही सकती है। पूरे विश्व में हिन्दी भाषी रहते हैं। हिन्दी विश्व की लोकप्रिय भाषाओं में से एक है। उन्होंने छात्राओं को हिन्दी पांडुलिपि लेखन एवं पोस्टर प्रस्तुतियों पर बधाई दी तथा अनेक महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अपनी कला को निखारने के सुझाव दिए। सरस्वती वंदना कृष्णा विश्वकर्मा बी.एससी. द्वितीय वर्ष ने प्रस्तुत की।
कार्यक्रम का सफल संचालन निधि कटारे एम.ए.प्रथम समसत्र ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन मनीषा त्रिपाठी सह प्राध्यापक हिन्दी विभाग ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय की निदेशक प्रतिभा सिंह, प्राचार्य अर्चना श्रीवास्तव, विधि प्राचार्य अंजू बाजपेयी तथा उप प्राचार्य रेणू मिश्रा सहित महाविद्यालय की समस्त प्राध्यापिकाएँ एवं छात्राएँ उपस्थित थीं। कार्यक्रम का सफल आयोजन हिन्दी विभाग की विभागाध्यक्ष अनुपमा चौहान, सह प्राध्यापक मनीषा त्रिपाठी, सह प्राध्यापक अनुराधा सिंह, सहायक प्राध्यापक अनीता तिवारी के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
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