सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल / नई दिल्ली : साहित्य अकादमी के सभागार में वरिष्ठ कवि–कथाकार और रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे के ताजा कहानी संग्रह ‘ग़रीबनवाज़’ का लोकार्पण एवं पुस्तक चर्चा समारोहपूर्वक आयोजित किया गया। यह आयोजन वनमाली सृजन पीठ, दिल्ली और राजकमल प्रकाशन समूह के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।
इस अवसर पर ‘ग़रीबनवाज़’ का लोकार्पण सुप्रसिद्ध कथाकार ममता कालिया की मौजूदगी और वरिष्ठ साहित्यकार जानकी प्रसाद शर्मा की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में श्री चौबे ने संग्रह से शीर्षक कहानी का पाठ करते हुए अपनी रचना प्रक्रिया पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि कहानी की पठनीयता और दृश्यात्मकता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति होती है।
ममता कालिया ने कहा कि संतोष चौबे सामाजिक सरोकारों और मानवता की पक्षधरता को केंद्र में रखकर लिखते हैं। ‘ग़रीबनवाज़’ उनकी यथार्थवादी दृष्टि और मेहनतकश वर्ग के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है। अध्यक्षीय वक्तव्य में जानकी प्रसाद शर्मा ने चौबे की कहानियों की असाधारण पठनीयता और गंभीर सामाजिक प्रश्नों को उठाने की क्षमता पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ आलोचक अखिलेश ने कहा कि चौबे की कहानियाँ यथार्थ को गहराई से चित्रित करती हैं और नए कथानुशासन का निर्माण करती हैं। विनोद तिवारी ने कहा कि इन कहानियों में प्रेम, करुणा और मानवता विशेष रूप से उपस्थित हैं। कथाकार अल्पना मिश्र ने कहा कि चौबे आत्मीय वातावरण में गहन विचार को केन्द्रीय बिंदु के रूप में प्रस्तुत करते हैं। युवा कथाकार आशुतोष ने उनकी कहानियों की वैज्ञानिक और मानवीय दृष्टि को रेखांकित किया।


समारोह में स्वागत उद्बोधन लीलाधर मंडलोई ने दिया और संचालन प्रांजल धर व कुणाल सिंह ने किया। आभार राजकमल प्रकाशन समूह के अशोक माहेश्वरी ने व्यक्त किया। इस मौके पर दिल्ली–एनसीआर से बड़ी संख्या में साहित्यकारों और पाठकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।
यह लोकार्पण कार्यक्रम केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं बल्कि समकालीन हिंदी कहानी के नए आयामों को रेखांकित करने का अवसर भी साबित हुआ।

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