सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल :  रबीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी में आयोजित एक भव्य समारोह में हिंदी छंद लेखन सर्टिफिकेट कोर्स के दो बैचों के विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रसिद्ध कवि धर्मेन्द्र सौलंकी ने कहा कि “छंद ही काव्य का वास्तविक स्वरूप है और वर्तमान समय में मंचों से मूल छंदों का लोप चिंताजनक है। ऐसे प्रशिक्षण कोर्स छंद आंदोलन को नई गति देंगे।” उन्होंने राष्ट्रीय कवि मैथिलि शरण गुप्त के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि कविता का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को उचित दिशा देना भी है।


यूनिवर्सिटी की उपकुलसचिव पूजा चतुर्वेदी ने बताया कि यह तीन माह का ऑनलाइन कोर्स देशभर के नवोदित कवियों को हिंदी छंदों की प्राथमिक जानकारी सिखाने वाला अपने प्रकार का पहला प्रयास है। यह कोर्स यूनिवर्सिटी के मानविकी एवं उदार कला संकाय के तहत संचालित होता है और छात्रों के कौशल विकास के साथ स्वावलंबन को बढ़ावा देता है।
मानविकी संकाय की डीन डॉ. रुचि मिश्री तिवारी ने बताया कि अक्टूबर 2024 से शुरू हुए इस कोर्स के दो बैच अब तक सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुके हैं। प्रमुख प्रशिक्षक कवि योगेश समदर्शी ने जानकारी दी कि कोर्स पूर्ण करने के बाद विद्यार्थियों को भोपाल में आयोजित इस समारोह में प्रमाण पत्र प्रदान किए गए, जहां सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने छंद प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में दो कविता संकलनों— काव्य समर्पण (नवीन कानूनगो) और भाव कानन (पूनम शुक्ला)—का विमोचन भी हुआ। समारोह में हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, बिहार, गुजरात, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 25 से अधिक विद्यार्थी शामिल हुए।
कार्यक्रम का संचालन अनिल शर्मा ‘चिंतक’ ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन कवि योगेश समदर्शी ने दिया। यह आयोजन न केवल हिंदी छंद लेखन को पुनर्जीवित करने का प्रयास था, बल्कि नवोदित कवियों को अपने हुनर को मंच पर प्रस्तुत करने का सशक्त अवसर भी प्रदान करता है।

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