सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय ने द ओपन यूनिवर्सिटी (यूके) और क्वालिटी एश्योरेंस एजेंसी (यूके) के सहयोग से “ओपन, डिस्टेंस एंड डिजिटल लर्निंग में गुणवत्ता आश्वासन के लिए श्रेष्ठ प्रथाओं के विकास” विषय पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। यह आयोजन आईजीएनयू, नई दिल्ली के बाबा साहेब अंबेडकर कन्वेंशन सेंटर में हुआ |
इस कार्यशाला का उद्देश्य ओपन, डिस्टेंस और ऑनलाइन शिक्षा की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए श्रेष्ठ प्रथाओं का आदान-प्रदान करना है। एनईपी 2020 के तहत वर्ष 2035 तक 50% सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) का लक्ष्य रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह लक्ष्य केवल ओपन, डिस्टेंस एंड डिजिटल लर्निंग के विस्तार और गुणवत्ता आश्वासन के माध्यम से ही हासिल किया जा सकता है।
उद्घाटन सत्र में इग्नू की कुलपति उमा कंजिलाल ने कहा, “हम उच्च शिक्षा की पहुँच और डिलीवरी में तकनीकी बदलाव देख रहे हैं। यह कार्यशाला गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम है।” वहीं मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद अध्यक्ष गणेशन कन्नबिरन ने कहा कि वर्तमान में केवल 40% विश्वविद्यालय और कॉलेज ही प्रत्यायन के दायरे में हैं। क्षमता निर्माण और नए ढांचे की जरूरत है।
द ओपन यूनिवर्सिटी, यूके के प्रो. देवेंद्र कोडवानी ने कहा, “भारत शिक्षा का निर्यातक बनने की क्षमता रखता है, लेकिन समाधान भारत से ही निकलने चाहिए।” शिक्षा मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार श्री मृत्युंजय बेहड़ा ने कहा कि भाषा विविधता और नीतिगत ढांचे की चुनौतियों से निपटना आवश्यक है।
ब्रिटिश काउंसिल की निदेशक (एजुकेशन इंडिया) सुश्री ऋत्तिका चंदा पर्रुक MBE ने कहा, “भविष्य द्वैत मोड का है। कोई विश्वविद्यालय केवल पारंपरिक नहीं रहेगा। भारत–यूके सहयोग शिक्षा गुणवत्ता को वैश्विक स्तर पर मजबूत करेगा।”
इस अवसर पर यूके और भारत के शैक्षणिक नेताओं, नीति निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और गुणवत्ता आश्वासन संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला में प्लेनरी एड्रेस, विषयगत चर्चाएँ और भविष्य के सहयोग हेतु एक्शन प्लान प्रस्तुत किए जा रहे हैं।
कार्यशाला का समापन इग्नू की निदेशक प्रो. शाची शाह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ होगा। उम्मीद है कि यह पहल “ओपन, डिस्टेंस एंड डिजिटल लर्निंग को और अधिक पारदर्शी, प्रभावी और विश्वसनीय बनाने में अहम योगदान देगी।
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