पाकिस्तान ने अपनी आत्मरक्षा रेखा की रचना करते हुए इंदुस जल संधि (IWT) पर भारत से फिर तीखी चेतावनी जारी की है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा: “दुश्मन एक बूंद भी पानी नहीं छीन सकता।” उन्होंने भारत की किसी भी कोशिश को संधि का उल्लंघन करार देते हुए कहा कि इसका जवाब “कठोरता से” दिया जाएगा।
पृष्ठभूमि:
यह बयान तब सामने आया जब सेना प्रमुख जनरल (फील्ड मार्शल) आसिम मुनीर ने अमेरिका में कहा कि यदि भारत इंदुस नदी पर बांध बनाता है तो “हम उसे 10 मिसाइल से गिरा देंगे।” इसके साथ ही उन्होंने परमाणु क्षमताओं का इशारा करते हुए कहा कि “जुबान पर जीवन खतरे में पड़े तो हम आधा विश्व साथ ले कर गिरेंगे।”
तीन दिवसीय उलझन:
इतने उग्र रुख के बीच पाकिस्तान ने फिर भी भारत से संधि को पुनर्स्थापित कराने की अपील की — यह एक विरोधाभासपूर्ण स्थिति उत्पन्न करता है।
अंतर्राष्ट्रीय कानूनी जटिलता:
IWT, 1960 की विश्व बैंक मध्यस्थता वाली संधि, जिसके तहत पश्चिमी नदियाँ पाकिस्तान को और पूर्वी नदियाँ भारत को सौंप दी गई थीं, अब एक विवादास्पद मोड़ पर है। भारत ने मई 2025 में पाकिस्तान में आतंकवाद के संदर्भ को लेकर संधि को “संक्षिप्त अवकाश” पर रखा था।
राजनयिक और क्षेत्रीय अस्थिरता:
पानी संस्करण में ये बयान केवल जलवाद नहीं, बल्कि एक रणनीतिक ब्लफ या शक्ति प्रदर्शन भी हैं। यह पाकिस्तान के लिए जल आतंकवाद से अधिक प्रभावी उपकरण हो सकता है, जो क्षेत्र में अस्थिरता और संभावित संघर्ष की आग को भड़काता है।
भारत की प्रतिक्रिया:
भारत ने ऐसे बयान “दुर्भाग्यपूर्ण” और “अतार्किक” करार दिए हैं। विदेश मंत्रालय ने इन्हें एक “खुली धमकी” माना है और इस बात पर जोर दिया है कि भारत अपनी जल नीति में अंतर्राष्ट्रीय नियमों और राष्ट्रीय सुरक्षा के संतुलन से ही चलेगा।
निष्कर्ष:
पानी जैसे आधारभूत संसाधन को प्रतिद्वंद्वी राष्ट्रों में हथियार के रूप में इस्तेमाल करना अंतरराष्ट्रीय नैतिकता और कानून की अनुचितता को दर्शाता है। इस विवाद से स्पष्ट होता है कि भारत–पाकिस्तान स्थिरता केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जल, ऊर्जा और भरोसे की साझेदारी पर भी टिकी है।
यह समय है जब अंतर्राष्ट्रीय सामुदायिक बोध और द्विपक्षीय संवाद दोनों को पुनर्जीवित किया जाए, ताकि जल पर भू-राजनीतिक तनाव शांत और न्यायोचित तरीके से विषयबद्ध हो सके।
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