सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारत के स्टार जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने शुक्रवार रात दोहा डायमंड लीग में 90.23 मीटर का थ्रो कर आखिरकार 90 मीटर की बड़ी बाधा को पार कर लिया। पिछले 8 सालों से 90 मीटर पार करने का प्रयास कर रहे नीरज के लिए यह एक बेहद खास उपलब्धि है।
90 मीटर मार्क क्यों है खास?
जेवलिन थ्रो के इतिहास में अब तक केवल 25 खिलाड़ी ही 90 मीटर से ऊपर का थ्रो कर पाए हैं। एशिया में सिर्फ 3 खिलाड़ी यह कारनामा कर सके हैं — नीरज चोपड़ा, पाकिस्तान के अरशद नदीम और चीनी ताइपे के चाओ-त्सुन चेंग। पेरिस ओलंपिक में सिल्वर जीतने के 9 महीने बाद नीरज ने यह मुकाम हासिल किया।
नीरज ने 90 मीटर कैसे पार किया?
कोचिंग में बदलाव: नवंबर 2024 में नीरज ने चेक गणराज्य के वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर और तीन बार के ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट जान जेलेजनी को अपना कोच बनाया। फरवरी 2025 से उनकी कोचिंग शुरू हुई।
तकनीकी सुधार: पेरिस ओलंपिक के वीडियो विश्लेषण के बाद जेलेजनी ने नीरज की तकनीक में दो बड़ी कमियां पकड़ीं — भाला फेंकते वक्त उनका भाला बहुत नीचे गिरता था और वे अपने शरीर को गलत तरीके से झुका रहे थे। इसके सुधार के लिए तकनीकी बदलाव किए गए।
चोट का इलाज: कमर की पुरानी चोट से जूझ रहे नीरज ने जेलेजनी के बताए डॉक्टर से इलाज करवाया और एक्सरसाइज की, जिससे उनकी फिटनेस में सुधार हुआ।
व्यक्तिगत बलिदान: ट्रेनिंग की शुरुआत के लिए नीरज ने अपनी शादी जल्दी की और रिसेप्शन टाला ताकि वो अपनी तैयारी में पूरी तरह से फोकस कर सकें।
नीरज की प्रतिक्रिया
90.23 मीटर का थ्रो करने के बाद नीरज ने कहा, “मैं बहुत खुश हूं लेकिन मेरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन अभी आना बाकी है। इस सीजन में और 90 मीटर से ऊपर के थ्रो देखने को मिलेंगे।” उन्होंने यह भी बताया कि कोचिंग, मौसम और सही हवा ने इस थ्रो में मदद की।
दोहा डायमंड लीग में प्रदर्शन
नीरज ने तीसरे प्रयास में यह व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया, हालांकि वे दूसरे स्थान पर रहे। जर्मनी के जूलियन वेबर ने 91.06 मीटर के थ्रो के साथ पहला स्थान लिया जबकि ग्रेनेडा के पीटर्स एंडरसन तीसरे नंबर पर रहे।
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