सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : रायसेन स्थित रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय और विश्व रंग फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित “विश्व रंग अंतरराष्ट्रीय हिंदी शोधार्थी सम्मेलन” अत्यंत गरिमामय, वैचारिक और सांस्कृतिक वातावरण में संपन्न हुआ। इस दो दिवसीय सम्मेलन में देश-विदेश से आए हिंदी प्रेमियों, शोधार्थियों, शिक्षकों और सांस्कृतिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।


सम्मेलन का उद्देश्य हिंदी को वैश्विक शोध की भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करना और युवा पीढ़ी को मातृभाषा में मौलिक शोध के लिए प्रेरित करना था। शारदा सभागार में उद्घाटन समारोह सरस्वती वंदना और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें प्रमुख अतिथि और वक्ता शामिल हुए। कुलाधिपति संतोष चौबे ने कहा, “हिंदी केवल भाषा नहीं, हमारी सांस्कृतिक चेतना है। हमें इसे आत्मगौरव के साथ अपनाना चाहिए।” उन्होंने वनमाली सृजन पीठ और हिंदी में तकनीकी लेखन की पहल का उल्लेख करते हुए इसे एक सांस्कृतिक आंदोलन बताया।


महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की कुलपति कुमुद शर्मा ने शोध को “जीवन की रोमांचक यात्रा” बताया और युवाओं से शोध को राष्ट्र निर्माण का साधन बनाने का आह्वान किया। प्रो. विनोद तिवारी ने हिंदी में तकनीकी शोध की आवश्यकता को रेखांकित किया, वहीं डॉ. मुकेश मिश्रा ने कहा कि “हिंदी स्थापना का आंदोलन आज भी जीवित है”। अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों – कतर से डॉ. शालिनी वर्मा और चीन से डॉ. विवेक मणि त्रिपाठी ने वैश्विक मंच पर हिंदी की भूमिका को विस्तार से बताया।
इस सम्मेलन ने यह स्पष्ट किया कि हिंदी अब केवल साहित्य की भाषा नहीं रही, बल्कि विज्ञान, तकनीक और वैश्विक संवाद की सशक्त माध्यम बन रही है। सम्मेलन समन्वयक सावित्री सिंह परिहार ने बताया कि यह आयोजन शोध को वैश्विक संवाद और सांस्कृतिक समरसता का माध्यम बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम है।

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