नई दिल्ली। श्रीलंका ने खाद्य संकट को लेकर आपातकाल की घोषणा कर दी है, क्योंकि प्राइवेट बैंकों के पास आयात के लिए विदेशी मुद्रा की कमी है। राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने चावल और चीनी सहित अन्य जरूरी सामानों की जमाखोरी को रोकने के लिए सार्वजनिक सुरक्षा अध्यादेश के तहत आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी। गौरतलब है कि इमरजेंसी का ऐलान चीनी, चावल, प्याज और आलू की कीमतों में तेज वृद्धि के बाद किया है। आलम यह है कि श्रीलंका में दूध पाउडर, मिट्टी का तेल और रसोई गैस की कमी के कारण दुकानों के बाहर लंबी कतारें लगी हुई हैं जमाखोरी के लिए सरकार व्यापारियों को जिम्मेदार ठहरा रही है। जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति राजपक्षे ने सेना के एक शीर्ष अधिकारी को धान, चावल, चीनी और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की आपूर्ति के समन्वय के लिए आवश्यक सेवाओं के आयुक्त जनरल के रूप में नियुक्त किया है। इस साल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले श्रीलंकाई करेंसी 75 फीसदी गिरा है। इसे देखते हुए सेंट्रल बैंक ऑफ श्रीलंका ने हाल ही में ब्याज दरों में वृद्धि की है आर्थिक आपातकाल के व्यापक उपाय का उद्देश्य आयातकों द्वारा राज्य के बैंकों पर बकाया ऋण की वसूली करना भी है। बैंक के आंकड़ों के अनुसार श्रीलंका का विदेशी भंडार जुलाई के आखिर में गिरकर 28 बिलियन डॉलर हो गया, जो नवंबर 2019 में 75 बिलियन डॉलर था, जब सरकार ने सत्ता संभाली थी और रुपया उस समय अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने मूल्य का 20 प्रतिशत से अधिक खो चुका है।