सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल / चंडीगढ़ : लुधियाना पश्चिम उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) की करारी हार के बाद दोनों दलों के बीच पुराने गठबंधन को पुनर्जीवित करने की अटकलें तेज हो गई हैं। लंबे समय से अलग-अलग चुनाव लड़ रही इन पार्टियों को अब यह एहसास हो रहा है कि एकजुटता के बिना पंजाब की सियासत में वापसी मुश्किल है।
उपचुनाव में भाजपा तीसरे और शिअद चौथे स्थान पर रही, जबकि आम आदमी पार्टी (आप) ने भारी अंतर से जीत दर्ज की। भाजपा और शिअद को कुल 28,526 वोट मिले, जबकि आप को अकेले 35,179 वोट मिले। विश्लेषकों के अनुसार, यदि दोनों पार्टियां एक साथ चुनाव लड़तीं तो परिणाम कुछ और हो सकते थे।
शिअद ने 2020 में कृषि कानूनों के विरोध में भाजपा से गठबंधन तोड़ा था। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को सिर्फ तीन सीटें मिलीं, जबकि भाजपा को दो सीटें। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली, और शिअद का केवल एक सांसद जीत पाया।
दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं ने माना कि गठबंधन की वापसी ही पंजाब में मजबूत उपस्थिति का रास्ता है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ भी ‘पंथक एकता’ की बात करते हुए गठबंधन के संकेत दे चुके हैं।
शिअद और भाजपा के इस संभावित समीकरण को पंजाब की सियासत में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, खासकर तब जब कांग्रेस और आप राज्य में सियासी मजबूती दिखा रहे हैं।
#शिअद, #बीजेपी, #गठबंधन, #लुधियाना_उपचुनाव, #पंजाब_राजनीति, #राजनीतिक_समीकरण, #लोकसभा_चुनाव