सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : दिल्ली विश्वविद्यालय ने मनोविज्ञान विभाग और चेष्टा कोच्चर नज सेंटर के सहयोग से “स्मार्टफोन की दुनिया में नज थ्योरी का भविष्य” विषय पर प्रथम चेष्टा कोच्चर स्मृति व्याख्यान 2025 का आयोजन किया। यह कार्यक्रम सोमवार, 17 नवंबर 2025 को शंकर लाल हॉल में आयोजित हुआ, जिसमें दिवंगत चेष्टा कोच्चर — एक अग्रणी व्यवहार विज्ञान विद्वान और नीति आयोग में भारत की पहली बिहेवियरल इनसाइट्स यूनिट की दृष्टिवान संस्थापक — की विरासत को सम्मानित करने के लिए अकादमिक विशेषज्ञ, नीति-निर्माता, व्यवहार वैज्ञानिक और छात्र उपस्थित हुए।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि के रूप में दक्षिण परिसर, दिल्ली विश्वविद्यालय की निदेशक प्रो. रजनी अब्बी उपस्थित रहीं। उनके साथ मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. उर्मि नंदा बिस्वास और सहायक प्रोफेसर एवं संयोजक डॉ. सुभाष मीणा भी उपस्थित थे। उनकी उपस्थिति ने विश्वविद्यालय की व्यवहार विज्ञान को बढ़ावा देने और चेष्टा कोच्चर की स्थायी विरासत का सम्मान करने की प्रतिबद्धता को उजागर किया।
फ्रैक्टल एनालिटिक्स के चीफ इवेंजेलिस्ट और फाइनल माइल कंसल्टिंग के चेयरमैन श्री बिजू डॉमिनिक ने मुख्य भाषण दिया। चेष्टा के व्यवहार विज्ञान में योगदान पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “चेष्टा ने हमें दिखाया कि साहस के साथ परंपरा को चुनौती देना क्या होता है। उन्होंने वह रास्ता चुना जिसे बहुत कम लोग जानते थे, और व्यवहार विज्ञान तथा नज थ्योरी को वास्तविक दुनिया की समस्याओं के समाधान में लाया, उस समय जब इसे व्यापक रूप से समझा भी नहीं गया था। उनका कार्य हमें याद दिलाता है कि सार्थक परिवर्तन अक्सर छोटे, सोच-समझकर किए गए ‘नज’ से शुरू होता है, जो मानव व्यवहार को गहराई से बदल सकते हैं। जब हम उनकी विरासत का सम्मान करते हैं, हमें उनके विश्वास को आगे बढ़ाना होगा कि ज्ञान, सहानुभूति और विज्ञान समाज की गहरी दरारों को उजागर कर उन्हें संभावनाओं में बदल सकते हैं।”
सीओएआई के महानिदेशक और चेष्टा कोच्चर के पिता लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. एस.पी. कोच्चर ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि साझा की। उन्होंने कहा, “चेष्टा के बारे में बोलना मुझे दुख और गर्व दोनों से भर देता है — दुख इसलिए कि वह अब हमारे बीच नहीं हैं और गर्व इसलिए कि उनकी विरासत आज भी चमक रही है। बचपन से ही वह सहानुभूतिशील, जिज्ञासु, निडर और दूसरों की सेवा के लिए समर्पित थीं। चाहे आधार, योजना आयोग, नीति आयोग या शिकागो विश्वविद्यालय में, उन्होंने अपनी प्रतिभा और मानवता से अमिट छाप छोड़ी। उनके जाने के बाद हमें उनके प्रभाव की गहराई का एहसास हुआ। हमारी अब केवल यह कामना है कि उनकी विरासत निरंतर प्रेरणा देती रहे और आगे बढ़ती रहे।”
चेष्टा कोच्चर की अग्रणी दृष्टि से प्रेरित होकर, दिल्ली विश्वविद्यालय में स्थापित चेष्टा कोच्चर नज सेंटर का उद्देश्य व्यवहार विज्ञान में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना है, विशेष रूप से यह समझना कि आधुनिक तकनीकों, जैसे स्मार्टफोन, के माध्यम से नज थ्योरी को कैसे लागू किया जा सकता है। चेष्टा का मानना था कि नीति-निर्माण को हमेशा इस आधार पर होना चाहिए कि लोग वास्तव में कैसे सोचते, व्यवहार करते और निर्णय लेते हैं, और सहानुभूतिपूर्ण, प्रमाण-आधारित नज व्यक्तियों को स्वयं और पृथ्वी के लिए बेहतर निर्णय लेने में सक्षम बना सकते हैं।
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