सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : डॉ. शरत कुमार राव के, प्रसिद्ध अस्थि रोग विशेषज्ञ और शैक्षणिक नेता, को रॉयल कॉलेज द्वारा चिकित्सा नेतृत्व और स्वास्थ्य प्रबंधन में उनके अग्रणी योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट (एफआरसीपी) से सम्मानित किया गया है। यह प्रतिष्ठित सम्मान 8 जुलाई को लंदन स्थित रॉयल कॉलेज में आयोजित एक समारोह में औपचारिक रूप से प्रदान किया गया।
डॉ. राव वर्तमान में मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन (एमएएचई) में प्रो वाइस चांसलर (हेल्थ साइंसेज) के रूप में कार्यरत हैं, यह पद उन्होंने 2023 से संभाला है। इससे पहले वह 2019 से 2023 तक कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज (केएमसी), मणिपाल के डीन रहे, और उससे पूर्व 2015–2019 तक एसोसिएट डीन तथा 2009–2014 तक आर्थोपेडिक्स विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य कर चुके हैं। अपने हर पद पर उन्होंने संस्थागत विकास, शैक्षणिक गुणवत्ता और क्लिनिकल प्रशिक्षण प्रणाली को सशक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रशासनिक कार्यों में उनके योगदान जितने उल्लेखनीय हैं, उतनी ही प्रतिष्ठा उनकी चिकित्सकीय सेवाओं को भी प्राप्त है। जटिल ट्रॉमा, जोड़ प्रत्यारोपण और घुटने की दूरबीन सर्जरी में विशेषज्ञ डॉ. राव ने जर्मनी, इटली, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में घुटना और कूल्हा प्रत्यारोपण में उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उनके अंतरराष्ट्रीय अनुभव ने एमएएचई और उससे आगे भी ऑर्थोपेडिक देखभाल और सर्जिकल प्रशिक्षण के स्तर को ऊंचा उठाया है।
यह मानद डॉक्टरेट उनके स्वास्थ्य नेतृत्व और नीति निर्माण में व्यापक प्रभाव को मान्यता देता है, विशेष रूप से ऐसे तंत्रों के डिज़ाइन में, जो शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ प्रभावी और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की दिशा में संतुलन बनाते हैं। रॉयल कॉलेज केवल उन्हीं को यह सम्मान प्रदान करता है जिनका कार्य स्वास्थ्य क्षेत्र में स्थायी और परिवर्तनकारी प्रभाव डालता है।
इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए एमएएचई के वाइस चांसलर, लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) एम. डी. वेंकटेश, वीएसएम (सेवानिवृत्त) ने कहा, “यह सम्मान पूर्णतः योग्य है क्योंकि डॉ. शरत राव शैक्षणिक ईमानदारी, नैदानिक उत्कृष्टता और दूरदर्शी नेतृत्व के मूल्यों का प्रतीक हैं। उनका कार्य न केवल एमएएचई में बल्कि व्यापक स्वास्थ्य और शैक्षणिक क्षेत्र में भी अमिट छाप छोड़ चुका है। हमें गर्व है कि उनके योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हुई है।”
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