सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, भोपाल के भारतीय ज्ञान परंपरा विभाग से संबद्ध शिक्षाविद् डॉ. अमित कुमार दूबे ने शोध जगत को एक महत्वपूर्ण वैचारिक योगदान दिया है। उन्होंने ‘भारतीय शोध पद्धति’ विषय पर एक मौलिक और विचारोत्तेजक पुस्तक का सृजन किया है, जो अनुसंधान के क्षेत्र में भारतीय बौद्धिक दृष्टिकोण को केंद्र में लाती है।
इस पुस्तक के सह-लेखक डॉ. विकास कुमार सिंह हैं। यह कृति इसलिए विशेष मानी जा रही है क्योंकि वर्तमान शोध जगत मुख्यतः पश्चिमी अवधारणाओं और पद्धतियों पर आधारित है, जबकि इस पुस्तक में लेखकों ने यह प्रतिपादित किया है कि भारतीय सभ्यता की अपनी एक सुदीर्घ, सुव्यवस्थित और गहन शोध परंपरा रही है, जिसकी प्रासंगिकता आज भी अक्षुण्ण है।
लेखकों का प्रयास है कि भारतीय दर्शन, ज्ञानमीमांसा और अनुभवपरक दृष्टि को आधुनिक शोध प्रक्रिया से जोड़ा जाए, जिससे अनुसंधान केवल तकनीकी अभ्यास न रहकर बोध और सत्य की खोज का साधन बने।
इस पुस्तक का विमोचन 12 से 14 फरवरी के बीच आयोजित राष्ट्रीय शोधार्थी समागम में किया जाना है । इस पुस्तक का प्रकाशन दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान ने किया है। इसका प्राक्कथन लोक संस्कृति के मर्मज्ञ विद्वान कपिल तिवारी जी ने लिखा है। राष्ट्रीय शोधार्थी समागम में राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान भोपाल, दत्तोपंत ठेंगड़ी के साथ सहयोगी संस्थान है। यह पुस्तक भारतीय दृष्टि को केंद्र में रखकर शोध-विमर्श को नया आयाम प्रदान करेगी।
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