सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के शोधकेन्द्र के द्वारा पीएच डी करने वाले छात्रों के लिए नई शिक्षा नीति 2020 के अन्तर्गत छःमाह का प्राक्शोधपाठ्यक्रम संचालित है। देशभर के उच्चकोटी के विद्वानों को आमन्त्रित कर शोध की बारीकियों से छात्रों को अवगत करा रहा है। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय शोध के क्षेत्र में वैश्वीकरण की प्रतिष्ठा स्थापित करने के लिए विद्यार्थियोंं का निर्माण कर रहा है। संस्कृत भाषा में लिखे गये शास्त्रीय ग्रन्थों में छुपे समाजोपयोगी गूढ रहस्यों को खोज कर उनकी उपयोगिता को उजागर करने का महत्त्वपूर्ण कार्य करेंगें।
भारत का अनुसंधानकर्ता और उसके द्वारा किये जाने वाला अनुसंधान विदेशों में अनुकरणीय हो। इसी ध्येय से निरन्तर प्रयासरत है। भोपालपरिसर का शोधकेन्द्र अपनी पूरी क्षमताओं का प्रयोग करता है। प्रो हंसकर झा ने बताया कि अनुसन्धान की गुणवत्ता पर हमारा पूरा ध्यान रहता है। हमारे शोधकेन्द्र के प्रभारी प्रो कृपाशंकर शर्मा लगातार शोधकर्ताओ को सचेत करते हुए गुणवत्तापूर्ण शोध करने के लिए प्रेरित करते रहते है। प्रो शर्मा ने बताया कि आज सारा विश्व संस्कृत की ओर ध्यान लगाए हुए है ताकि विश्वशान्ति विश्व मंगलता का तात्विक उपाय संस्कृत के शोधकर्ता ही दे सकते हैं।
भारतीयज्ञानपरम्परा को संस्कृत के बिना नही समझा जा सकता। आभासीय पटल के माध्यम से प्रो विजयशंकर शुक्ल वाराणसी ने व्याख्यान मातृका सम्पादन पर व्याख्यान देते हुए बताया कि ब्राह्मी लिपि में कोई ग्रन्थ नहीं मिल रहे है तथापि सम्भावना निरन्तर बनी हुई है शायद भविष्य में मिल जाए। देवनागरी, शारदा, ग्रन्थलिपि तथा क्षेत्रीय लिपियों में हस्तलिखित साहित्य मिलता है। उन हस्तलिखित ग्रन्थों का सम्पादन करना भारतीय विद्वानों तथा छात्रों का दायित्व है। शुक्लजी ने लिपियों की ऐतिहासिक जानकारी भी सभी छात्र को दी और बताया कि इस क्षेत्र में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के शोधकर्ता अपना कीर्तिमान जरूर स्थापित करेगा यह मुझे विश्वास है। प्रो श्रीगोविन्दपाण्डेय पाण्डेय ने धन्यवाद व्यक्त किया।
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