सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की बढ़ती मांग और आपूर्ति में गड़बड़ी के चलते कई क्षेत्रों में सिलेंडरों की ब्लैक मार्केटिंग का मामला सामने आ रहा है। उपभोक्ताओं को जहां एक ओर सरकारी दर पर गैस सिलेंडर लगभग ₹900 के आसपास मिलना चाहिए, वहीं कई जगहों पर यही सिलेंडर खुलेआम ₹1500 से ₹1800 तक में बेचा जा रहा है। इससे आम उपभोक्ताओं को आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा है। bस्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ गैस एजेंसियों और अवैध आपूर्तिकर्ताओं की मिलीभगत से यह काला कारोबार चल रहा है। उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं दिया जाता और कृत्रिम कमी पैदा कर दी जाती है। इसके बाद जरूरतमंद लोगों को मजबूरी में दोगुनी कीमत पर सिलेंडर खरीदना पड़ता है। खासकर त्योहारों, शादी-ब्याह के मौसम और ठंड के समय यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। कई इलाकों में घरेलू गैस सिलेंडरों को व्यावसायिक उपयोग में भी लगाया जा रहा है, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सिलेंडर की उपलब्धता और कम हो जाती है। छोटे होटल, ढाबे और फूड स्टॉल सस्ते घरेलू सिलेंडरों का उपयोग करते हैं, जिससे काले बाजार को बढ़ावा मिलता है। उपभोक्ताओं का कहना है कि शिकायत करने के बावजूद इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। गैस एजेंसियों की निगरानी और वितरण प्रणाली को मजबूत करने की जरूरत है, ताकि सिलेंडरों की कालाबाजारी पर रोक लगाई जा सके। प्रशासन का कहना है कि यदि कहीं भी गैस सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग की शिकायत मिलती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने उपभोक्ताओं से भी अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अवैध वसूली या कालाबाजारी की सूचना तुरंत प्रशासन को दें। विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शी वितरण प्रणाली, नियमित जांच और सख्त कार्रवाई के जरिए ही गैस सिलेंडरों की ब्लैक मार्केटिंग पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
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