सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : सागर एक ओर केंद्र की मोदी सरकार पूरी दुनिया में भारतीय योग पद्धति का डंका बजा रही है और योग को शिक्षा के मुख्य आधार के रूप में स्थापित करने की नीतियां बना रही है, वहीं दूसरी ओर सागर स्थित डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रशासन योग के ऐतिहासिक महत्व को ही मिटाने पर उतारू है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक विवादास्पद निर्णय लेते हुए नवनिर्मित ‘महर्षि पतंजलि भवन’ को खाली करने की अधिसूचना जारी कर दी है, जिससे देश के सबसे पुराने योग विभागों में से एक के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
विशेष फंड से तैयार हुआ था अपना भवन
विश्वविद्यालय के इस विभाग का गौरवशाली इतिहास रहा है, जहाँ 1959 में इसकी स्थापना हुई और 1980 में देश की पहली योग पीएचडी यहीं से शुरू की गई थी। वर्षों तक छोटे कमरों में संचालित होने के बाद, तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने योग शिक्षा के महत्व को देखते हुए 2015-16 में ₹12 करोड़ रुपए की विशेष राशि आवंटित की थी। इसी राशि से 2021 में इस भव्य भवन का निर्माण हुआ था ताकि शोधार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिल सकें, लेकिन अब विवि प्रशासन ने बीती 8 जनवरी को इसे खाली करने का आदेश दे दिया है।
पुरानी बिल्डिंग में कैसे संभव होगा प्रायोगिक अभ्यास?
प्रशासन योग विभाग को पुरानी कंप्यूटर साइंस बिल्डिंग में शिफ्ट करना चाहता है, जहाँ जगह का अत्यधिक अभाव है। वर्तमान में यहाँ हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र और बनारस सहित अन्य कई राज्यों के लगभग 150 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। छात्रों और शिक्षकों का कहना है कि योग एक प्रयोगात्मक विषय है जिसके लिए शांत वातावरण और बड़े हॉल्स की जरूरत होती है। ओल्ड कंप्यूटर साइंस बिल्डिंग में पर्याप्त जगह न होने के कारण न केवल नियमित कक्षाएं, बल्कि परीक्षाएं आयोजित करना भी असंभव हो जाएगा।
सांसद को सौंपा ज्ञापन, कुलपति का मौन
प्रशासन की इस ‘कारगुज़ारी’ के खिलाफ विभाग के शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने एकजुट होकर क्षेत्रीय सांसद लता वानखेड़े को ज्ञापन सौंपा है और केंद्र सरकार की मंशा के विपरीत लिए गए इस निर्णय को रोकने की गुहार लगाई है। विभाग के अध्यक्ष प्रो. बी.आई. गुरू का कहना है कि यह भवन विशेष बजट से योग विभाग के नाम पर ही बना है, इसे खाली कराना तर्कसंगत नहीं है। इस संवेदनशील मामले पर प्रभारी कुलपति प्रो. यशवंत ठाकुर ने आदेश जारी करने के बाद चुप्पी साध ली है।
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