सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए स्पष्ट किया है कि देश में संविधान सर्वोच्च है, संसद नहीं। उन्होंने कहा कि भारत के लोकतंत्र के तीनों प्रमुख स्तंभ — न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका — सभी संविधान के अधीन कार्य करते हैं।
अमरावती में आयोजित एक अभिनंदन समारोह में बोलते हुए मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा, “कुछ लोग मानते हैं कि संसद सर्वोच्च है, लेकिन मेरी दृष्टि में देश का संविधान सबसे ऊपर है। संसद के पास संविधान में संशोधन करने की शक्ति जरूर है, लेकिन वह संविधान के मूल ढांचे (बुनियादी संरचना) को नहीं बदल सकती।”
गवई ने यह भी कहा कि संविधान ही वह आधार है, जो देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को सुरक्षित रखता है और तीनों अंगों को उनके अधिकार व सीमाएं निर्धारित करता है। उन्होंने यह भी दोहराया कि न्यायपालिका का कर्तव्य है कि वह संविधान की रक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि कोई भी संस्था संविधान से ऊपर न हो।
बता दें कि बी.आर. गवई ने हाल ही में भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब संवैधानिक अधिकारों और संसद की शक्तियों को लेकर बहस तेज है।
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