सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस  /  आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल   : पिछले एक दशक में भारतीय कॉरपोरेट सेक्टर का प्रदर्शन बेहद दमदार रहा है। 2020 के बाद से खासकर मुनाफे की रफ्तार बिक्री से कहीं अधिक रही। 2024-25 तक कंपनियों का शुद्ध मुनाफा औसतन 16% की दर से बढ़ा, जबकि इसी अवधि में बिक्री केवल 9.7% की वार्षिक दर (सीएजीआर) से बढ़ी। कोविड-19 महामारी के बाद कॉरपोरेट मुनाफा हर साल औसतन 25.7% की दर से बढ़ा, जबकि बिक्री में बढ़ोतरी 12.7% ही रही।

मार्जिन ऐतिहासिक ऊंचाई पर

वित्त वर्ष 2014-15 में जहां प्रॉफिट मार्जिन केवल 7.8% था, वहीं 2024-25 तक यह बढ़कर 12% तक पहुंच गया। यह बीते 25 वर्षों में सर्वाधिक है। हालांकि बैंकिंग, फाइनेंस, इंश्योरेंस, ऑयल-गैस और आईटी सेक्टर की कंपनियों को हटाकर यह औसत 8.8% बनता है।

बड़ी कंपनियों की पकड़ मजबूत

विशेषज्ञों का मानना है कि छोटी कंपनियों के बंद होने और बड़ी कंपनियों द्वारा अधिग्रहण की वजह से बाजार में उनकी पकड़ मजबूत हुई। इससे उन्हें उत्पादों की कीमतें मनमाने ढंग से बढ़ाने की छूट मिली, जिससे मुनाफा और बढ़ा।

तीन प्रमुख कारण:

जीएसटी लागू होने के बाद छोटी कंपनियों के लिए नियमों के अनुरूप चलना मुश्किल हुआ।

आईबीसी (दिवालिया संहिता) ने अधिग्रहण प्रक्रिया आसान बना दी।

कोविड लॉकडाउन में कई छोटी कंपनियां पूंजी की कमी से बंद हो गईं।

इस ट्रेंड से स्पष्ट है कि भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र अब बड़े खिलाड़ियों के इर्द-गिर्द केंद्रित होता जा रहा है।

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