सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भोपाल के लिंक रोड नंबर 3 स्थित पत्रकार कॉलोनी के सामने सोमवार को दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के नवीन भवन का भूमिपूजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश सोनी, उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, संस्थान के अध्यक्ष अशोक पांडेय और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में कार्यक्रम को संबोधित किया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भारतीय प्राचीन ज्ञान परंपरा की ओर लौटना आवश्यक है। उन्होंने तक्षशिला और नालंदा जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत सदियों से ज्ञान का केंद्र रहा है, जहां विश्वभर से विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि जीवन के विविध पक्षों पर शोध को प्रोत्साहित करने के लिए ऐसे संस्थानों की आवश्यकता है, जो भारतीय विचार और चिंतन को केंद्र में रखकर अनुसंधान करें।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश सोनी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय समाज सदियों से आरण्यक, ग्राम्य और नगरीय व्यवस्थाओं के माध्यम से संचालित होता आया है। उन्होंने प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि मनुष्य के साथ-साथ पशु, पक्षी, वनस्पति, नदी, पहाड़ आदि का भी धरती पर समान अधिकार है। जो जितना समझदार है, उसकी जिम्मेदारी उतनी ही अधिक है।
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने दत्तोपंत ठेंगड़ी जी के भारत केंद्रित विचारों की सराहना करते हुए कहा कि उनके योगदान ने भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शोध का वातावरण बेहतर हुआ है, और हमें शिक्षा, संस्कृति और शोध को भारत केंद्रित बनाना आवश्यक है।
संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने संस्थान द्वारा जनजातीय संस्कृति के अध्ययनों का उल्लेख करते हुए कहा कि नया भवन अपने लक्ष्य की पूर्ति में सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि श्रद्धेय ठेंगड़ी राष्ट्रभक्ति और आधुनिकता का अनूठा संगम थे, और वे देश का विकास भारतीय सनातन ज्ञान और शिक्षा के आधार पर करना चाहते थे।
दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के अध्यक्ष अशोक पांडेय ने बताया कि संस्थान अपने मौलिक शोध के जरिए समाज में एकात्मता का प्रसार कर रहा है और समावेशी शोध को बढ़ावा देने का कार्य कर रहा है। निदेशक डॉ. मुकेश मिश्रा ने संस्थान की प्रगति का विवरण देते हुए कहा कि संस्थान ने शोध के क्षेत्र में भारतमुखी चिंतन को बढ़ावा देने के साथ ही अकादमिक जगत में सांस्कृतिक विमर्श को भारत केंद्रित बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
कार्यक्रम के दौरान आगामी 1 मार्च 2025 से आयोजित होने वाले तीन दिवसीय राष्ट्रीय शोधार्थी समागम के हिंदी और अंग्रेजी पोस्टर का विमोचन किया गया। साथ ही, संस्थान की वार्षिक स्मारिका ‘संकेत रेखा’ का भी विमोचन हुआ। समारोह के अंत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और अन्य अतिथियों ने परिसर में पौधारोपण किया, जिससे पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।
इस कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों तथा अकादमिक संस्थाओं के पदाधिकारी, विषय-विशेषज्ञ और शोधार्थी शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार विजय मनोहर तिवारी ने किया।
दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान का यह नया भवन भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध पक्षों को समाज के सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और भारतीय दृष्टिकोण से शोध को नई दिशा प्रदान करेगा।
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