सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : चीन और यूरोप के बीच छिड़ी Tariff War (शुल्क युद्ध) वैश्विक व्यापार संतुलन को प्रभावित कर रही है। एक-दूसरे पर भारी टैरिफ लगाने से दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच तनाव बढ़ा है, लेकिन इसी टकराव के बीच भारत के लिए नए अवसर उभरते नजर आ रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, चीन से आयात महंगा होने के बाद यूरोपीय कंपनियां अब वैकल्पिक सप्लाई चेन की तलाश में हैं। ऐसे में भारत मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो कंपोनेंट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर्स में एक मजबूत विकल्प बनकर उभर सकता है। भारत की कम लागत, बड़ा श्रम बाजार और सरकार की Make in India जैसी योजनाएं इसे प्रतिस्पर्धी बनाती हैं।
इसके अलावा, यूरोप की कई कंपनियां चीन पर निर्भरता कम करना चाहती हैं, जिसे “China Plus One Strategy” कहा जाता है। इस रणनीति में भारत की भूमिका अहम हो सकती है। अगर भारत सही नीतिगत फैसले, इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार और व्यापार समझौतों पर फोकस करता है, तो निर्यात में बड़ी छलांग संभव है।
हालांकि, चुनौतियां भी कम नहीं हैं। लॉजिस्टिक्स, ब्यूरोक्रेसी और व्यापार नियमों में सुधार की जरूरत होगी। बावजूद इसके, विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन–यूरोप टैरिफ वॉर भारत के लिए लॉन्ग-टर्म ग्रोथ का सुनहरा मौका बन सकता है।
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