सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस  /  आईटीडीसी न्यूज़ भोपालनई दिल्ली  : चीन ने इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों से जुड़ी उन्नत तकनीकों के निर्यात पर एक और बड़ा प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे भारत समेत कई देशों की इलेक्ट्रिक वाहनों योजनाओं पर सीधा असर पड़ सकता है। खासतौर पर लिथियम आयरन फॉस्फेट और लिथियम मैंगनीज आयरन फॉस्फेट जैसी प्रमुख बैटरी कैथोड तकनीकों के साथ-साथ ब्राइन और स्पोड्यूमीन से लिथियम निष्कर्षण पर अब चीनी सरकार की सख्त निगरानी रहेगी।

नए नियमों के तहत इन तकनीकों का निर्यात करने से पहले कंपनियों को चीनी सरकार से विशेष अनुमति लेनी होगी। यह कदम चीन द्वारा अपनी तकनीकी बढ़त को बचाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन भारत जैसे देश, जो इलेक्ट्रिक वाहनों  बैटरी निर्माण में चीन पर अत्यधिक निर्भर हैं, उनके लिए यह एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

हालांकि, भारत इस चुनौती को अवसर के रूप में भी देख रहा है। सरकार ऑस्ट्रेलिया, चिली और अर्जेंटीना जैसे लिथियम-समृद्ध देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी की दिशा में काम कर रही है। साथ ही, भारत में PLI स्कीम के तहत घरेलू बैटरी निर्माण को प्रोत्साहन मिल रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रतिबंध भारत को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित करेगा। लेकिन निकट भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों  की कीमतें बढ़ सकती हैं, क्योंकि सप्लाई चेन बाधित होगी और कच्चे माल की लागत में इजाफा हो सकता है।

निष्कर्ष: चीन का यह प्रतिबंध जहां भारत की इलेक्ट्रिक वाहनों इंडस्ट्री को तत्काल झटका दे सकता है, वहीं यह दीर्घकालीन रणनीतिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक जरूरी चेतावनी भी है।

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