सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : हाल के दशकों में प्रौद्योगिकी जगत में हुई तीव्र प्रगति ने न केवल आधुनिक युद्ध की प्रकृति को बदला है, बल्कि उसकी पूरी संरचना को रूपांतरित कर दिया है। बढ़ते साइबर युद्ध के खतरों, डिजिटल जासूसी के जोखिमों और उभरती तकनीकों के हथियारीकरण ने भारत के लिए यह अनिवार्य बना दिया है कि वह अपनी साइबर सुरक्षा क्षमता को सुदृढ़ करे और अगली पीढ़ी की सुरक्षित संचार प्रणालियाँ विकसित करे। ये क्षमताएँ न केवल देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार को सुनिश्चित करेंगी, बल्कि राष्ट्रीय रक्षा तैयारियों को भी सुरक्षित बनाएंगी।
भारत की साइबर सुरक्षा और सुरक्षित संचार अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करने के उद्देश्य से चंडीगढ़ विश्वविद्यालय ने इंडिया इंटरनेट फाउंडेशन (आईआईएफओएन) के सहयोग से एआईओआरआई (एडवांस्ड इंटरनेट ऑपरेशंस रिसर्च इन इंडिया) ढांचे के अंतर्गत एक इंटरनेट प्रौद्योगिकी अनुसंधान प्रयोगशाला की स्थापना की है। इस पहल के साथ चंडीगढ़ विश्वविद्यालय देश का पहला निजी विश्वविद्यालय और कुल मिलाकर तीसरा संस्थान बन गया है, जिसने ऐसी विशेष सुविधा स्थापित की है—इससे पहले भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी और भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) बेंगलुरु यह कदम उठा चुके हैं।
स्वदेशी साइबर सुरक्षा अनुसंधान और अगली पीढ़ी के सुरक्षित इंटरनेट सिस्टम की दिशा में पहल
यह पहल एक सशक्त स्वदेशी अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण पर केंद्रित है। यह प्रयोगशाला इंटरनेट प्रौद्योगिकी, इंटरनेट मापन प्रणालियाँ, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), डीएनएस अवसंरचना, क्वांटम-सुरक्षित डीएनएस और अगली पीढ़ी की इंटरनेट प्रणालियों में अनुसंधान, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए एक सहयोगात्मक मंच के रूप में कार्य करेगी। इस कार्य में इंडिया इंटरनेट फाउंडेशन तकनीकी इनपुट, उपकरण, टेस्टबेड और अनुसंधान सहयोग प्रदान करेगा।
एआईओआरआई सहयोग के तहत चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर के अनुसंधान टेस्टबेड तक पहुंच मिलेगी, जो कई स्थानों पर फैले सैकड़ों मापन एंकरों से जुड़ा होगा। इससे सुरक्षित और बुद्धिमान इंटरनेट प्रणालियों में उन्नत प्रयोग और विकास संभव होगा। यह पहल एज कंप्यूटिंग, वितरित प्रणालियाँ, आईओटी और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में उत्पादन-स्तर के टेस्टबेड के माध्यम से पाठ्यक्रम संचालन को भी समर्थन देगी। साथ ही विद्यार्थियों को इंटर्नशिप, लाइव प्रोजेक्ट और व्यावहारिक प्रशिक्षण के अवसर मिलेंगे।
यह सहयोग संयुक्त कार्यशालाओं, हैकाथॉन, फैकल्टी विकास कार्यक्रमों, प्रशिक्षण सत्रों और सहयोगी अनुसंधान परियोजनाओं के माध्यम से उद्योग–शिक्षा जगत सहभागिता को परिणामोन्मुख बनाएगा। स्वदेशी अनुसंधान अवसंरचना, डाटा सेट और संदर्भ संरचनाओं तक पहुंच सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, उन्नत विश्लेषण और सिस्टम डिजाइन में नवाचार को बढ़ावा देगी, जो राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा प्राथमिकताओं के अनुरूप होगा।
जैसे-जैसे आधुनिक युद्ध साइबर और सूचना क्षेत्रों में विस्तार कर रहा है, विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करना, इन उभरते क्षेत्रों में उच्च कौशलयुक्त पेशेवरों को तैयार करना और सुरक्षित संचार प्रणालियों का निर्माण करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि देश की महत्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना की रक्षा की जा सके।
आज भारत वैश्विक स्तर पर साइबर हमलों के सबसे अधिक लक्षित देशों में से एक है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से लगभग 65.9 लाख साइबर धोखाधड़ी शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें कुल 55,659 करोड़ रुपये की राशि शामिल थी। विश्व के लगभग आधे डिजिटल भुगतानों में भारत की हिस्सेदारी और तेजी से बढ़ती डिजिटल अवसंरचना को देखते हुए, एक मजबूत साइबर सुरक्षा तंत्र और कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।
इन राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा चिंताओं के समाधान की दिशा में, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय और Indian प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सूचना सुरक्षा शिक्षा एवं जागरूकता (आईएसईए) कार्यक्रम के अंतर्गत संयुक्त पहलों के माध्यम से साइबर सुरक्षा शिक्षा, उन्नत अनुसंधान और नवाचार को मजबूत करने हेतु एक रणनीतिक शैक्षणिक सहयोग की शुरुआत की है।
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