सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : लगातार गर्दन या पीठ दर्द की शिकायत करने वाले कई मरीज अपनी एक दैनिक आदत को नज़रअंदाज़ कर देते हैं—भोजन के बाद चाय या कॉफी पीना। श्री रामकृष्ण अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ बताते हैं कि भोजन के तुरंत बाद कैफीन का सेवन हड्डियों के स्वास्थ्य, मांसपेशियों के तनाव और सूजन को प्रभावित कर सकता है। अस्पताल के विशेषज्ञ मेडिकल जानकारियाँ, चेतावनी संकेत और व्यावहारिक जीवनशैली संबंधी सुझाव साझा करते हैं, ताकि लोग अपनी रीढ़ और जोड़ों की सुरक्षा कर सकें।

हर किसी को सुबह जल्दी या शाम के समय गरम चाय या कॉफी पीना पसंद होता है। कुछ लोग काम के बीच-बीच में भी पूरे दिन इसका आनंद लेते हैं। हमारा मस्तिष्क इस तरह प्रशिक्षित हो जाता है कि बार-बार एक कप चाय या कॉफी की इच्छा होने लगती है। लेकिन क्या यह वास्तव में फायदेमंद है? हम सभी ने सुना है कि ये गरम पेय नींद के चक्र को बाधित करते हैं और खाली पेट लेने पर पेट में एसिडिटी बढ़ा देते हैं। अब ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों का कहना है कि विशेष रूप से भोजन के बाद ली जाने वाली ये गरम पेय पदार्थ जोड़ों के दर्द का कारण बन सकते हैं।

विशेषज्ञ ऑर्थोपेडिक डॉक्टर यह समझाते हैं कि ये पेय कितने स्वस्थ हैं और वास्तव में ये हड्डियों के स्वास्थ्य, मांसपेशियों की कार्यप्रणाली, शरीर की मुद्रा और दर्द की अनुभूति को कैसे प्रभावित करते हैं—खासकर उन लोगों में जो पहले से ही रीढ़ संबंधी परेशानी से ग्रस्त हैं।

गर्दन और पीठ दर्द: बढ़ती चिंता

आज अधिकांश लोग गर्दन और पीठ दर्द की शिकायत करते हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करना, गलत मुद्रा, निष्क्रिय कार्यशैली, पोषण की कमी और तनाव—ये सभी रीढ़ पर अत्यधिक दबाव डाल सकते हैं। हालांकि केवल चाय या कॉफी को सीधे तौर पर गर्दन या पीठ दर्द का दोषी नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ बताते हैं कि भोजन के तुरंत बाद इनका नियमित सेवन मौजूदा मस्कुलोस्केलेटल समस्याओं को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ा सकता है।

चाय और कॉफी के कारण पोषक तत्वों के अवशोषण पर प्रभाव

ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ बताते हैं कि चाय और कॉफी में कैफीन और टैनिन जैसे तत्व होते हैं, जो भोजन के तुरंत बाद सेवन करने पर आवश्यक खनिजों के अवशोषण में बाधा डाल सकते हैं।

कैल्शियम का अवशोषण:

कैल्शियम हड्डियों की मजबूती और रीढ़ की स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके अवशोषण में लगातार रुकावट समय के साथ हड्डियों को कमजोर कर सकती है।

आयरन का अवशोषण:

आयरन का स्तर कम होने से मांसपेशियों में थकान और ऊतकों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी हो सकती है, जिससे दर्द और जकड़न बढ़ती है।

मैग्नीशियम संतुलन:

मैग्नीशियम मांसपेशियों को शिथिल करने और तंत्रिका कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके स्तर में कमी से मांसपेशियों में अकड़न और ऐंठन बढ़ सकती है।

कई महीनों या वर्षों में ये पोषण संबंधी असंतुलन हड्डियों के घनत्व में कमी और मांसपेशियों की असुविधा का कारण बन सकते हैं, विशेष रूप से गर्दन और निचली पीठ में।

कैफीन और मांसपेशियों के तनाव के बीच छिपा संबंध

कैफीन एक उत्तेजक तत्व है जो सीधे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करता है। ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक कैफीन सेवन से:

विशेष रूप से गर्दन और कंधों में मांसपेशियों का तनाव बढ़ सकता है

पुरानी जोड़ों या हड्डियों की समस्याओं वाले लोगों में दर्द की संवेदनशीलता बढ़ सकती है

नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जो मांसपेशियों की मरम्मत और रिकवरी के लिए अत्यंत आवश्यक है

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