सम्पादकीय

“भारत में जेनेरिक बनाम ब्रांडेड दवाएँ: डॉक्टर महंगी दवाएँ क्यों लिखते हैं?”

प्रो. सैलेश कुमार घटुआरी एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद् और शोधकर्ता हैं, जिन्हें फार्मेसी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में 26 वर्षों का

आदिवासी मामलों के मंत्री पर केंद्रीय मंत्री का बयान – क्या यह तर्कसंगत है? भूमिका

आदिवासी मामलों के मंत्री पर केंद्रीय मंत्री का बयान – क्या यह तर्कसंगत है? भूमिका हाल ही में केंद्रीय मंत्री

क्या वास्तव में 12 लाख तक की आय कर मुक्त है? टैक्स स्लैब प्रणाली की उलझन

बजट 2024 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने करदाताओं को राहत देने के लिए कई अहम घोषणाएँ कीं। खासकर, नई

संवैधानिक गरिमा और राजनीतिक मर्यादा का प्रश्न

भारतीय लोकतंत्र में संवैधानिक पदों की गरिमा और राजनीतिक संवाद की मर्यादा का विशेष स्थान रहा है। हाल ही में

“AI से दोस्ती करें, लेकिन अपनी अक्ल मत खोएं!” – मुकेश अंबानी की खास सीख

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने पंडित दीनदयाल ऊर्जा विश्वविद्यालय (PDEU)

महाकुंभ भगदड़: क्या हमने कुछ सीखा?

प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान मौनी अमावस्या के स्नान पर्व पर जो त्रासदी घटी, उसने एक बार फिर यह सोचने

भारत का बजट 2025: संतुलित विकास की ओर एक कदम

भारत का बजट 2025 देश की आर्थिक स्थिति, विकास की गति और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा को निर्धारित करने वाला

“पंचायत चुनाव: लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने का अवसर”

 भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में पंचायत चुनाव का महत्व केवल ग्रामीण विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की

मोटे अनाजों पर भारत की वैश्विक पहल: प्रो. सुनील गोयल

मोटे अनाजों (Millets) के महत्व को समझते हुए और लोगों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्वदेशी और वैश्विक

पांच साल बाद फिर शुरू होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा: आस्था और कूटनीति का मिलन

पांच सालों के लंबे इंतजार के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा के फिर से शुरू होने की घोषणा ने देशभर के