सम्पादकीय

ऑपरेशन सिंदूर पर सियासी संग्राम: ट्रंप के नाम पर नया मोड़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘ट्रंप के डर’ को लेकर विपक्षी आरोपों को सिरे से खारिज करने के बाद कांग्रेस का

लोकसभा में अविश्वास की आवाज़े: क्या संसद में संवाद का संकट है?

लोकसभा में असामान्य हस्तक्षेप – एक संकेत मानसून सत्र के दौरान एक असामान्य दृश्य देखने को मिला जब गृह मंत्री

बिहार में SIR विवाद: क्या यह सुधार है या सियासी सेंध?

बिहार में चल रही SIR (Special Intense Revision) प्रक्रिया अब केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण की कवायद नहीं रही। यह

मराठी बोलने की अपील पर हिंसा: भाषा की अस्मिता या सहिष्णुता की हार?

मुंबई जैसी आधुनिक, बहुभाषी और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध नगरी में जब एक छात्र को सिर्फ “मराठी में बात करें”

अटल जी की सरकार न झुकी न रुकी और जीत लिया कारगिल युद्ध – डॉ. राघवेंद्र शर्मा

कारगिल का युद्ध और उस पर स्था पित भारत की विजय कई मायनों में विलक्षण हैं। ये एक ऐसा व्यांपक

‘इंडिया आउट’ से FTA तक: हिंद महासागर में बदले रिश्तों की धारा

मालदीव में हालिया भारत-मालदीव वार्ता केवल औपचारिक कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं थी, बल्कि हिंद महासागर में बदलते शक्ति-संतुलन और रणनीतिक सोच

इंजीनियर सस्ते, मिस्त्री महंगे? इंफोसिस–TCS में फ्रेशर्स की सैलरी पर असली बहस

देश की शान मानी जाने वाली आईटी इंडस्ट्री के भीतर एक कड़वी सच्चाई धीरे-धीरे सामने आ रही है: आज इंफोसिस

न्यायपालिका की गरिमा और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा पर महाभियोग की गंभीरता

भारत का लोकतंत्र तीन प्रमुख स्तंभों—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका—पर टिका है। इनमें न्यायपालिका को निष्पक्षता, स्वतंत्रता और गरिमा का प्रतीक

इंजीनियर सस्ते, प्लंबर महंगे: तर्क की हार या नीति की चूक?

भारत की आईटी क्रांति की नींव उस युवा इंजीनियर ने रखी, जिसने सीमित संसाधनों में भी तकनीकी दक्षता के बल

ममता बनर्जी की मंदिर राजनीति: सांस्कृतिक प्रतीकों पर नियंत्रण की लड़ाई

पश्चिम बंगाल की राजनीति का परिदृश्य अब केवल विकास और धर्मनिरपेक्षता की भाषा तक सीमित नहीं रहा। बीते कुछ वर्षों