बिजनेस

टाटा ग्रुप के शेयर को अचानक खरीदने की मची होड़, शेयर में लगा अपर सर्किट

Tata group: भारत में इनफ्लाइट कनेक्टिविटी की पेशकश करने के लिए कंपनी द्वारा Intelsat के साथ साझेदारी करने के बाद

सितंबर में बैंक कब और कहां रहेंगे बंद

सितंबर की शुरुआत गणेश चतुर्थी के दूसरे दिन के अवकाश के साथ हो रही है। इस पूरे महीने अलग-अलग जगहों

अडानी ग्रुप की NDTV डील में फंसा है क्या कोई पेच? एक्सपर्ट से समझिए डील का कानूनी पक्ष

Adani-NDTV Deal: अडानी समूह की  (Aadani Group) कंपनी ने कुछ दिन पहले ऐलान किया था कि उन्होंने एनडीटीवी (NDTV) में 29 प्रतिशत हिस्सेदारी को खरीद लिया है। कंपनी के इस बयान ने बाजार में हलचल पैदा कर दिया है। लेकिन क्या इस पूरी डील पर कोई नया पेच फंस गया है? यह सवाल इसलिए खड़ा हो रहा है क्योंकि एनडीटीवी के प्रमोटर्स की तरफ से दिए गए बयान में कहा गया था कि उन्हें इस डील की कोई जानकारी नहीं थी। कंपनी की तरफ से दिए गए अब नए बयान में कहा गया है कि इस पूरे मसले पर अडानी समूह की मीडिया कंपनी को सेबी का अप्रवूल लेना होगा। बता दें, अडानी समूह ने दिए गए कर्ज के बदले इस 29 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया है। आइए जानते हैं कि एक्सपर्ट इस पूरे मसले पर क्या कह रहे हैं? क्या है एक्सपर्ट की राय?  अडानी समूह ने घोषणा किया था कि उनके पास एनडीटीवी में 29.18 प्रतिशत हिस्सेदारी है और वह अतिरिक्त 26 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए खुली पेशकश लाएगा। इस अधिग्रहण के पीछे मुख्य कारण वह बकाया कर्ज है जो एनडीटीवी की प्रमोटर कंपनी आरआरपीआर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड ने विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (वीसीपीएल) से लिया था। इकाई ने 2009-10 में 403.85 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। इस कर्ज के एवज में आरआरपीआर ने वॉरंट जारी किए थे। इस वॉरंट के जरिए वीसीपीएल के पास कर्ज नहीं लौटाने की स्थिति उसे आरआरपीआर में 99.9 प्रतिशत हिस्सेदारी में बदलने का अधिकार था। अधिग्रहण के कदम पर लॉ एक्कपर्ट ने कहा कि 2009-10 में परिवर्तनीय वॉरंट जारी करने की शर्तें महत्वपूर्ण होंगी और किसी भी विवाद को लेकर निर्णय अनुबंध की शर्तों के तहत ही होगा। इंडस लॉ के रवि कुमार ने कहा कि आमतौर पर वॉरंट को इक्विटी शेयर में बदलने के लिए उसे जारी करने वाली कंपनी से किसी पूर्व सहमति की आवश्यकता नहीं होती है। उन्होंने कहा, ‘अगर ऐसी चीजें कॉमर्शियल समझ का हिस्सा है, तो उन्हें वॉरंट बदलने की शर्तों के हिस्से के तहत स्पष्ट करने की आवश्यकता है।’ कुमार ने कहा, ‘ यह मामला वास्तव में अनुबंध पर निर्भर करता है और किसी भी विवाद का फैसला निर्धारित शर्तों के आधार पर किया जाएगा। स्पाइस रूट लीगल ने कहा प्रवीण राजू ने कहा कि यह 2014 में रिलायंस के नेटवर्क-18 के अधिग्रहण की याद दिलाता है। उन्होंने कहा, ‘अगर आरआरपीआर होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड ने वीसीपीएल को जो वॉरंट जारी किया था, उसमें इक्विटी शेयर में बदलने का प्रावधान है, तो मौजूदा सार्वजनिक घोषणा और खुली पेशकश कानून के दायरे में है। पॉयनियर लीगल के शौभिक दासगुप्ता ने कहा कि अडानी समूह के अधिग्रहण का रास्ता पूरी तरह से सोची गयी रूपरेखा पर आधारित है। इस तरह के वॉरंट की शर्तें तय करेंगी कि क्या उसे इक्विटी शेयर में बदलने की अनुमति है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर चुनौती दी गई तो लंबी कानूनी लड़ाई हो सकती है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में वकील और लॉ कंपनी आर्क लीगल की भागीदार खुशबू जैन ने कहा कि इस मामले में सहमति का सवाल ही नहीं उठता क्योंकि यह पहले से मौजूद अनुबंध की शर्तों के तहत उठाया गया कदम है।

एक हफ्ते में 40 घंटे काम करेंगे चिली के कर्मचारी

दुनियाभर के कई देश सरकारी और निजी कर्मचारियों की छुट्टियां बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। भारत में अगर नया लेबर कोड लागू हुआ तो कर्मचारियों को सप्ताह में 48 घंटे काम करना होगा। नए कोड के मुताबिक कर्मचारियों को लगातार चार दिन ऑफिस में 12-12 घंटे काम करना होगा। इस 12 घंटे के दौरान उन्हें दिन में दो बार आधे-आधे घंटे की छुट्टी मिलेगी, लेकिन अच्छी बात यह कि चार दिन 12-12 घंटे काम करने के बाद कर्मचारियों को तीन दिन की लम्बी छुट्टी भी मिलेगी। लेकिन, चिली के राष्ट्रपति ने नई योजना पेश की है। इसके मुताबिक, कर्मचारियों को अब सप्ताह में 40 घंटे तक ही काम करना होगा। दरअसल, चिली के राष्ट्रपति गेब्रियल बोरिक की ओर से कहा गया कि उन्होंने एक विधेयक पारित करने के प्रयासों को फिर से शुरू कर दिया है, जो देश में काम के घंटे कम करेगा। इस विधेयक के अनुसार, काम करने के घंटों को 45 की बजाय 40 कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा, इस पर काम काफी पहले हो जाना चाहिए था, लेकिन पिछली सरकार की वजह से इसमें देरी हुई। मौजूदा राष्ट्रपति गेब्रियल बोरिक सरकार की प्रवक्ता कैमिला वैलेजो ने इस प्रस्ताव को पेश भी कर दिया है। राष्ट्रपति ने इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है।

एनडीटीवी के शेयरों में लगातार 5वें दिन उछाल

अडाणी ग्रुप द्वारा अधिग्रहण के खबरों के बीच आज यानी गुरुवार को भी एनडीटीवी के शेयर उड़ान भर रहे हैं। एनएसई पर बुधवार के अपर सर्किट के साथ बंद भाव 388.20 के मुकाबले आज एक बार फिर 5 फीसद की अपर सर्किट के साथ 407.60 रुपये पर पहुंच गया है। पिछले एक साल में एनडीटीवी का शेयर 442 फीसदी चढ़ा है। इस साल की शुरुआत से अब तक यह 254 फीसदी ऊपर जा चुका है। अधिग्रहण की खबर पहली बार सामने आने के बाद से कंपनी के शेयर का भाव दोगुना से भी अधिक हो चुका है। पिछले 5 साल में इसने 933 फीसद का रिटर्न दिया है। बता दें एनडीटीवी के शेयरों में बुधवार को बाजार खुलते ही तेज उछाल आया। मंगलवार के बंद भाव के मुकाबले एनडीटीवी का शेयर बीएसई पर 380 रुपये पर खुला। थोड़ी ही देर में यह पांच फीसदी की छलांग लगाकर 384.50 रुपये पर पहुंच गया। मंगलवार को भी एनडीटीवी के शेयर पर अपर सर्किट लगा था और यह पांच फीसदी चढ़कर 366.20 रुपये पर बंद हुआ था। इस तरह चली शेयर अधिग्रहण की प्रक्रिया अडानी ग्रुप ने हाल ही में अपनी मीडिया कंपनी एएमजी मीडिया नेटवर्क्स बनाई है। एनडीटीवी के शेयरों का अधिग्रहण इसी एएमजी मीडिया नेटवर्क्स की सब्सिडियरी विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड करने जा रही है। इस कंपनी ने 12 साल पहले एनडीटीवी की एक प्रमोटर कंपनी आरआरपीआर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड को कर्ज दिया था, जिसके बदले शेयरों का अधिग्रहण किया जा रहा है। अडाणी समूह ने यह भी बताया है कि वो एनडीटीवी के अतिरिक्त 26 प्रतिशत शेयर खरीदने के लिए भी एक खुला प्रस्ताव लेकर आएगा। अगर अडाणी समूह इसमें सफल होता है तो एनडीटीवी की उसकी कुल हिस्सेदारी 55.18 प्रतिशत हो जाएगी और वह सबसे बड़ा शेयरधारक बन जाएगा। इस समय एनडीटीवी समूह के सबसे बड़े शेयरधारक उसके संस्थापक प्रणय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय हैं। इनके पास एनडीटीवी के सिर्फ 32 प्रतिशत शेयर बचे हैं।

PM Kisan की किस्त पाने वाले लाभार्थियों की संख्या घटी

पीएम किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों को 12वीं किस्त का बेसब्री से इंतजार है। योजना में गड़बड़ियों को रोकने के लिए सरकार ने 31 अगस्त तक ई-केवाईसी की डेट बढ़ा दी है। मोदी सरकार की सख्ती के चलते पिछली दो किस्तों को पाने वाले किसानों की संख्या कम हो गई है। अगस्त-नवंबर 2021-22 की 2000-2000 रुपये की किस्त कुल 11 करोड़ 19 लाख 25 हजार 347 किसानों के खातों में पहुंची थी। इसके बाद से इसमें लगातार कमी देखी जा रही है। रही बात 12वीं किस्त के आने कि तो 15 सितंबर से पहले किसानों के खातों में आने की पूरी संभावना है। गांव-गांव लाभार्थियों के सत्यापन और ई-केवाईसी के चलते दिसंबर-मार्च 2021-22 में किस्त पाने वाले किसानों की संख्या घटकर 11 करोड़ 14 लाख 92 हजार 273 रह गई। वहीं 11वीं किस्त यानी अप्रैल-जुलाई 2022-23 में यह घटकर 10 करोड़ 92 लाख 23 हजार 183 पर आकर सिमट गई। जबकि, पीएम किसान योजना में रजिस्टर्ड किसानों की संख्या 12 करोड़ से अधिक है। क्या है पीएम किसान सम्मान निधि योजना पीएम किसान सम्मान निधि योजना किसान परिवारों के लिए है। परिवार का आशय पति-पत्नी और दो नाबालिग बच्चे। स्कीम के नियमों के मुताबिक पीएम किसान का पैसा किसान परिवार को मिलता है यानी परिवार के किसी एक सदस्य के खाते में 6000 रुपये सालाना 2000-2000 की तीन किस्तों में डायरेक्ट बैंक खाते में आते हैं।

एक साल में 2700% का रिटर्न

यह साल अभी तक निवेशकों के लिए काफी मुश्किलों भरा रहा है। साल 2022 में स्टॉक मार्केट (Stock Market) में उतार और चढ़ाव की वजह से कई कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली है। लेकिन इस मुश्किल दौर में भी कई कंपनियों ने अपने निवेशकों को निराश नहीं किया है। जेनसॉल इंजीनियरिंग लिमिटेड (Gensol Engineering Ltd) उन्हीं शेयरों में से एक है जिसने बीते एक साल के दौरान निवेशकों को मालामाल बना दिया है। कंपनी के शेयरो में इस दौरान 2700 प्रतिशत से अधिक की उछाल देखने को मिली है। आइए जानते हैं इस साल जेनसॉल इंजीनियरिंग लिमिटेड (Gensol Engineering Ltd Share Performance) के शेयर का प्रदर्शन कैसा रहा है। 24 अगस्त 2022 को कंपनी के शेयर की कीमत 53.63 रुपये थी। जोकि अब बढ़कर 1548 रुपये हो गई है। पिछले एक साल के दौरान कंपनी ने अपने निवेशकों को बीएसई में 2758.82 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। वहीं, इस साल के अबतक के प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी के शेयर के भाव 1184.10 रुपये की उछाल देखने को मिली है। बीते 6 महीने का प्रदर्शन भी उत्साहित करने वाला रहा है। कंपनी के शेयरों में इन 6 महीनों के दौरान 554.83 प्रतिशत की उछाल देखने को मिली। इस दौरान एक शेयर की कीमत 233.65 रुपये से बढ़कर 1548 रुपये हो गई। अंतिम 1 महीने की बात करें तो इस दौरान भी निवेशकों को अच्छा रिटर्न मिला है। कंपनी एक शेयर का भाव इस दौरान 67.34 प्रतिशत तक बढ़ गया है। एक लाख के निवेश पर मिला कितना रिटर्न? जिस किसी निवेशक ने एक महीने पर इस स्टॉक पर दांव लगाया होगा उसका रिटर्न बढ़कर 1.69 लाख रुपये हो गया होगा। वहीं, 6 महीने पहले इस स्टॉक पर भरोसा जताने वाले निवेशकों का एक लाख रुपया बढ़कर 6.62 लाख रुपये हो गया है। ठीक इसी तरह साल के पहले दिन एक लाख का निवेश करने वाले निवेशकों का रिटर्न अब बढ़कर 12.99 लाख रुपये हो गया है। जबकि जिन निवेशकों ने एक साल पहले इस स्टॉक पर भरोसा जताया होगा और अबतक उस को होल्ड किया होगा, ऐसे निवेशकों का एक लाख रुपये पर रिटर्न 28.86 लाख रुपये मिला है। कंपनी ने शेयर बाजार में 18 अक्टूबर 2019 को डेब्यू किया था। तब से अबतक कंपनी के शेयर का भाव 2300 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुका है।

अडानी ग्रुप के दांव को लोगों ने ‘शत्रुतापूर्ण अधिग्रहण’ कहा

एशिया के सबसे बड़े रईस गौतम अडानी के नई दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड (एनडीटीवी) न्यूज चैनल को संभालने की खबर दर्शकों के लिए एक बड़े झटके के रूप में सामने आई है और लोगों ने इसे “शत्रुतापूर्ण अधिग्रहण” (Hostile Takeover) कहा है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि न्यूज चैनल ने दावा किया है कि एनडीटीवी का 29.18% हिस्सा बिना चर्चा, सहमति या नोटिस के हासिल कर लिया गया है। अडानी ने  दिग्गज NDTV का शत्रुतापूर्ण अधिग्रहण के लिए पहले ब्रॉडकास्टर में 29.18% हिस्सेदारी के अप्रत्यक्ष अधिग्रहण के साथ और 26% नियंत्रण हिस्सेदारी खरीदने की पेशकश की। एनडीटीवी ने कहा कि फाउंडर्स या कंपनी के किसी इनपुट के बिना कर्ज को इक्विटी में बदल दिया गया। पिछले साल अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) के तहत मीडिया शाखा, अडानी मीडिया वेंचर्स लिमिटेड (एएमवीएल) ने डिजिटल बिजनेस न्यूज प्लेटफॉर्म क्विंटिलियन बिजनेस मीडिया प्राइवेट लिमिटेड (क्यूबीएम) का अधिग्रहण किया था। इस खबर ने भारतीय कॉरपोरेट उद्योग में “शत्रुतापूर्ण अधिग्रहण” के विषय पर एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। तो आइए जानें वास्तव में “शत्रुतापूर्ण अधिग्रहण” क्या है? शत्रुतापूर्ण अधिग्रहण तब होता है, जब कोई कंपनी या कोई व्यक्ति टार्गेटेड कंपनी के बोर्ड/प्रबंधन की इच्छा के विरुद्ध किसी अन्य कंपनी को अपने कब्जे में लेने का प्रयास करता है। यह उस कंपनी के निदेशक मंडल की सहमति के बिना किसी कंपनी के साथ अधिग्रहण, शत्रुतापूर्ण अधिग्रहण है। शत्रुतापूर्ण अधिग्रहण (Hostile Takeover)  कैसे किया जाता है? मान लें कि कंपनी ‘ए’ कंपनी ‘बी’ को खरीदने के लिए बोली प्रस्ताव प्रस्तुत करती है। और, कंपनी ‘बी’ ने यह कहते हुए प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया कि यह शेयरधारकों के सर्वोत्तम हित में नहीं है। हालांकि, कंपनी ‘ए’ विभिन्न तरीकों से सौदे को मजबूर करने का प्रयास करती है: जैसे प्रॉक्सी वोट, निविदा प्रस्ताव  या एक बड़ा स्टॉक खरीद कर। निविदा प्रस्ताव एक अधिग्रहणकर्ता व्यवसाय के शेयरधारक से बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर शेयर खरीदने का प्रस्ताव है।

62 रुपये के प्रीमियम पर है इस कंपनी का शेयर

निवशकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। एयरपोर्ट पर सर्विस देने वाली कंपनी Dreamfolks Services Ltd का आईपीओ आज खुल रहा है। कंपनी ने इस आईपीओ के लिए प्राइस बैंड 308 रुपये से 326 रुपये तय किया है। जिन भी निवेशकों की दिलचस्पी  Dreamfolks Services Ltd के आईपीओ में है वो 26 अगस्त 2022 तक इसे सब्सक्राइब कर सकते हैं। यानी उनके पास इस पर दांव लगाने का मौका तीन दिन के लिए रहेगा। बता दें, कंपनी ने एंकर इंवेस्टर्स के जरिए 253 करोड़ रुपये जुटाए हैं। बीएसई की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार कंपनी ने एंकर निवेशकों को 7.76 करोड़ शेयर 326 रुपये प्रति शेयर के भाव से बेचें हैं। बाजार पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट के अनुसार ग्रे मार्केट में कंपनी का 62 रुपये के प्रीमियम पर उपलब्ध है। Dreamfolks Services Limited के शेयरों का अलॉटमेंट 1 सितंबर 2022 को हो सकता है। जबकि कंपनी 6 सितंबर 2022 को लिस्ट हो सकती है। इस आईपीओ को लेकर क्या बोल रहे हैं एक्सपर्ट  Jainam ब्रोकिंग अपने नोट्स में साझा करते हैं,‘हम इस आईपीओ को कुछ पैरामीटर पर सब्सक्राइब करने की सलाह देते हैं। कंपनी के ऊपर कोई कर्ज नहीं, इंडस्ट्री की स्थिति पहले से बेहतर हो रही है। कंपनी के पास कोई प्राइवेट इक्विटी नहीं है।’ क्या करती है कंपनी? कंपनी के आईपीओ के लॉट साइज 46 शेयरों का है। आईपीओ पूरी तरह से प्रमोटरों द्वारा बिक्री पेशकश (OFS) पर आधारित है। प्रवर्तक लिबर्टा पीटर कलात, दिनेश नागपाल और मुकेश यादव द्वारा 1.72 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री पेशकश की जाएगी ड्रीमफोक्स, यात्रियों के लिए एक उन्नत हवाई अड्डे पर एडवांस सुविधा प्रदान करवाने के लिए जानी जाती है। कंपनी की तरफ से ग्राहकों को लाउंज, खाना, स्पा, मीट एंड असिस्ट और ट्रांसफर एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। कंपनी इस कोराबार में 2013 से है। कैसी है कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति 31 सितंबर 2021 तक के आंकड़ों के अनुसार कंपनी की नेट वर्थ 64.7 करोड़ रुपये था। कंपनी को रेवन्यू सितंबर 2021 की तिमाही के दौरान 85.1 करोड़ रुपये का रहा था। वित्त वर्ष 2021 में कंपनी को 105.6 करोड़ रुपये का रेवन्यू हुआ था। जोकि वित्त वर्ष 2020 की तुलना में कम है। तब कंपनी का रेवन्यू 367.04 करोड़ रुपये का हुआ था।

नौकरी के लिए शानदार रहा जून का महीना, ईपीएफओ ने इतने लाख नए सदस्य जोड़े

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO Latest Updates) ने जून 2022 में शुद्ध रूप से 18.36 लाख नए सदस्य जोड़े। यह