सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल / पटना : बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन में सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर खींचतान बढ़ती जा रही है। कांग्रेस ने अधिक सीटों की मांग की है, जबकि राजद अपने रुख पर अड़ा हुआ है। कांग्रेस ने शुरुआत में 70-75 सीटों की मांग रखी थी, जबकि राजद केवल 50-55 सीटें देने के लिए तैयार था। इससे गठबंधन में विश्वास का संकट पैदा हो गया है। कांग्रेस का तर्क है कि संगठनात्मक रूप से वह मजबूत हुई है और उसके नेताओं का ग्राउंड नेटवर्क सुधरा है। इसलिए उसे गठबंधन में सम्मानजनक हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। वहीं, राजद का कहना है कि भूमि और संघर्ष उसका है, इसलिए सीटों पर पहला अधिकार भी उसका है। महागठबंधन के वाम दल और वीआइपी के साथ कांग्रेस के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
नेतृत्व के चेहरे को लेकर भी मतभेद है। राजद का कहना है कि तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री पद के स्वाभाविक उम्मीदवार हैं, जबकि कांग्रेस इसके लिए तैयार नहीं है। कांग्रेस वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री चेहरे का चयन गठबंधन को मिले वोटों के आधार पर होना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि सीटों और नेतृत्व को लेकर यह खींचतान चुनावी रणनीति और गठबंधन के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है। यदि गठबंधन के दल सहमत नहीं होते हैं तो यह चुनावी समीकरणों पर गहरा असर डाल सकता है। फिलहाल महागठबंधन ऊपर से एकजुट दिखाई दे रहा है, लेकिन सीटों और नेतृत्व के विवाद को लेकर दलों के बीच लगातार विचार-विमर्श जारी है।
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